मोदीजी, पूरे देश से पकौड़े तलवाएँगे, तेल अडानी का गैस अंबानी की, बेसन पतंजलि का होगा, ये है मोदिनॉमिक्स
सोशल-वाणी

मोदीजी, पूरे देश से पकौड़े तलवाएँगे, तेल अडानी का गैस अंबानी की, बेसन पतंजलि का होगा, ये है मोदिनॉमिक्स

हम कितने मंदबुद्धि लोग हैं जो मोदीजी जैसे विश्व के प्रमुख अनर्थशास्त्री की बात को समझ ही नही पा रहे हैं बातो बातो में देश के बेरोजगारों को एक नयी दिशा दिखा गए।

मोदीजी ने एंकर से ही पूछ लिया ‘अगर जी न्यूज़ के बाहर कोई पकौड़े बेच रहा तो वो रोजगार है कि नहीं?’ दरअसल यह सवाल एंकर से नही है यह सवाल रोजगार पर प्राइम टाइम कर हल्ला मचाते रवीश कुमार से है।

यह सवाल, नोटबन्दी और जीएसटी के बाद के धंधे की व्यथा हर ग्राहक को बांचते छोटे-बड़े व्यापारी से है, यह सवाल उन किसानों से है जिनकी फसल खेत में ही खड़ी रह गयी क्योंकि मंडी में उतने दाम भी नही मिल रहे थे जितना फसल कटाई और उसे मंडी तक पहुँचाने का खर्चा था, और जो रोजगार की तलाश में शहरों में चले आये।

ये सवाल उन बेरोजगार लोगो से हैं जो चपरासी और पटवारी बनने के लिए लाइनों में लग रहे है। कोचिंग क्लास के चक्कर लगा रहे है और जिनका बाप विधायक भी नही है

आप पकौड़े तलने को छोटी-मोटी चीज समझे हैं, दरअसल यह मेक इन इंडिया का एक प्रमुख लक्ष्य है यही तो स्टार्टअप योजना, स्टैंडअप योजना की बुनियाद है, पकोड़े तल लेना वह भी जी स्टूडियो के बाहर यह महान संकल्पना है यह राष्ट्र गौरव की बात है।

आप जरा गहराई से इस योजना को समझे, स्टूडियो के बाहर पकोड़े तलवाने की बात एक चाय वाला ही कर सकता हैं। मोदी जी बोल रहे हैं कि मेरे पास कोई अनुभव नही था लेकिन मोदीजी गलत बोलते हैं उनके पास चाय बनाने का जो अनुभव था उसी आधार पर उन्होंने पकोड़े तलवाने की बात निकाली हैं, मनमोहन सिंह होते तो कुछ और बोलते खैर जाने दे।

आप ध्यान दीजिएगा कितनी गहरी सोच है मोदीजी की पकोड़े तलने की बेसिक रिक्वायरमेंट क्या है ? सबसे पहले तो आपको पकौड़ा तलने के लिए तेल लगेगा और खाद्य तेलों का सबसे बड़ा कामकाज कौन कर रहा है जी हां आप सही समझे अडानी जी ,………पकोड़े तलने में जो गैस की टंकी लगेगी वो अम्बानी जी देंगे आखिरकार कमर्शियल गैस के वही तो सबसे बड़े सप्लायर है……. बेसन पतंजलि का होगा ओर ऐसे पकोड़े खाने से जब जनता का पेट खराब होगा तो इलाज भी पतंजलि की दवाइयां करेगी,

ऐसा नही है कि मोदीजी को केवल अपने पूंजीपति मित्रों की ही चिंता है, पकौड़े के लिए बेसन तो चना दाल से निकलेगा इसलिए किसान को भी मोदी जी समझा रहे हैं कि भाई अब जरा नकदी फसलों की तरफ ध्यान दो कब तक गेंहू-चावल की खेती करते रहोगे जरा दालों की खेती पर ध्यान दो …

मोदीजी को उन सरकारी कर्मचारियों की भी चिंता है जो गाहे बगाहे इन स्ट्रीट वेंडर्स से वसूली करने पहुंच जाते है, नोटबन्दी के बाद वे भी परेशान थे यह उनके भी भले की योजना है उन्हें भी लगी बंधी ऊपरी इनकम होती रहेगी।

तो ओवरऑल आप देखे तो यह बहुत अद्भुत योजना है मोदी जी ने बहुत सोच समझकर पकोड़े तलने की बात की है यह मोदीनॉमिक्स है, यह इकनॉमिक्स से ऊपर की चीज़ है हमारे जैसे मंदबुद्धि लोगो के लिए नही है यह गूढ़ ज्ञान है।

बड़े बड़े बाबा लोग उच्च कोटि मनाली वाले माल का सेवन करते हैं तब उन्हें ऐसा ज्ञान प्राप्त होता है। धन्य है वो जी स्टूडियो जहाँ ऐसी ज्ञान गंगा बह निकली और धन्य है वो सुधीर तिहाड़ी जो इस कथा के निमित्त बने, धन्य है मोदीजी आप धन्य है।

मैं जा रहा हूँ जी स्टूडियो के बाहर पकोड़े का ठेला लगाने, आप चल रहे हैं क्या ?

  • गिरीश मालवीय