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कांवड़ियों को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, कहा- हीरो बनने का शौक है तो अपना घर जलाओ, सार्वजनिक संपत्ति नहीं

कोर्ट ने पुलिस को निर्देश देते हुए कहा कि उन सभी कांवड़ियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें जिन्होंने कानून को अपने हाथों में लिया है।

कांवड़ियों द्वारा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख़्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश देते हुए कहा कि उन सभी कांवड़ियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें जिन्होंने कानून को अपने हाथों में लिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चाहे इस मामले में एफआईआर न दर्ज हुई हो पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना अपराध है और पुलिस को इस पर ज़रूर कार्रवाई करनी चाहिए।

कांवडियों द्वारा वाराणसी और इलाहाबाद में राजमार्गों को रोके जाने पर नाराज़गी जताते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने सख्त लहजे में कहा कि आप अपने घर को जलाकर हीरो बन सकते हैं लेकिन तीसरे पक्ष की संपत्ति नहीं जला सकते।

इन मामलों में पुलिस के रवैये पर सवाल खड़े करते हुए कोर्ट ने कहा कि हमने वीडियो में कांवडियों को कार को पलटते हुए देखा, क्या कारवाई हुई? इतना ही नहीं पदमावत फिल्म को लेकर हंगामा किया गया, फिल्म की हीरोइन की नाक काटने की धमकी दे दी गई, मराठा आरक्षण और SC/ST एक्ट को लेकर हिंसा हुई, क्या इन सबमें कार्रवाई हुई? हमें ज़िम्मेदारी तय करनी होगी।

बता दें कि शुकवार को सुप्रीम कोर्ट में भारत के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने देशभर में कंवड़ियों के कारण कानून और व्यवस्था की समस्या के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक समूहों को धर्म के नाम पर हंगामा और तोड़फोड़ करने की आज़ादी मिल गई है। इस समस्या से निपटने के लिए अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से सुझाव मांगे थे।

कोर्ट में इस मामले पर सरकार के रुख पर बहस हुई है। राजनीतिक टिप्पणीकारों का मानना है कि सरकार धर्म और भक्ति के नाम पर गुंडागर्दी को इजाज़त दे रही है।