मनुस्मृति के बजाए संघी-भाजपाई हमारे देश के संविधान को जला रहे है, मोदी जी कुछ तो शर्म करो : जिग्नेश मेवाणी
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मनुस्मृति के बजाए संघी-भाजपाई हमारे देश के संविधान को जला रहे है, मोदी जी कुछ तो शर्म करो : जिग्नेश मेवाणी

पीएम मोदी कुछ टिप्पण करेंगे इस मामले में? या अपना चित-परिचित मौन बनाए रखेंगे?

देश की राजधानी के जंतर मंतर पर खुलेआम संविधान को जलाया गया। 9 अगस्त को जातिवादियों के गिरोह ने लोकतंत्र की बुनियाद कही जाने वाली संविधान को फाड़कर जला दिया। घटना को 24 घंटे से ज्यादा बीत चुका है लेकिन सरकार की तरफ से इनपर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। क्यों?

क्या संविधान फाड़ने और जलाने वाले देशद्रोह नहीं है? और विश्वविद्यालय में छात्रों द्वारा नारा लगाना देशद्रोह है? भारत के संविधान में ही यकीन नहीं रखने वाले ये जातिवादी आतंकी क्या देश के लिए खतरा नहीं हैं?

मोदी सरकार ने संविधान पर हमला करने वाले इन जातिवादी आतंकियों पर अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया है। सत्ताधारी बीजेपी और पीएम मोदी से सवाल पूछते हुए गुजरात के वडगाम से विधायक और दलित एक्टिविस्ट जिग्नेश मेवाणी ने लिखा है कि...

'मनुस्मृति के बजाय संघी भाजपाई हमारे देश के संविधान को जला रहे है। PMOIndia कुछ टिप्पण करेंगे इस मामले में? या अपना चित-परिचित मौन ही बनाए रखेंगे? जितना जितना फ़ासीवाद आगे बढ़ता जाएगा यह लोग बाबा साहब को और भी अपमानित करेंगे - यही इनका असली चरित्र है। मोदी जी कुछ तो शर्म करो।'

बता दें कि 9 अगस्त को खुद ऊंची जाति का कहने वाले इन जातिवादियों ने अपने आयोजन में संविधान और संविधान निर्माता अम्बेडकर को अपमानित किया। दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को मिलने वाले संवैधानिक अधिकार 'आरक्षण' से इन जातिवादियों को परेशानी है।

इसलिए मनु की संतानों ने अपने आयोजन में आरक्षण मुर्दाबाद, संविधान मुर्दाबाद, अंबेडकर मुर्दाबाद, संविधान जलाओ देश बचाओ के नारे भी लगाए। जिस संविधान से देश चलता है उसे जलाकर देश बचान की बात कर रहे थे ये मूर्ख। इतना ही नहीं जाति श्रेष्ठा की बिमारी से ग्रस्त इन जातिवादियों ने मनुवाद जिंदाबाद, मनुस्मृति जिंदाबाद के नारे भी लगाए।

इस विषैले आयोजन का संचालन कर रहा व्यक्ति बार बार अपने ब्राह्मण होने का दंभ भर रहा था। मनु की इन संतानों का आरोप है कि संविधान ने उन्हें कुछ नहीं दिया। साथ ही संविधान ने उनके अधिकार को छीन लिया। सवाल उठते हैं, संविधान ने इन मनुवादियों का कौन सा अधिकार छीन लिया?

छूआछूत करने का अधिकार? जाति के आधार पर समाज को बाटने का अधिकार? शोषण करने का अधिकार? खुद को सर्वश्रेण और देवता बताने का अधिकार? दूसरों को शूद्र और अछूत बताने का अधिकार? शिक्षा पर एकाधिकार का अधिकार?

अगर मनुवादी अपने इन अधिकारों को वापस चाहते हैं, तो बिलबिलाते रहें। क्योंकि अब उन्हें शोषण का अधिकार नहीं मिलने वाला। संविधान भारत के सभी नागरिकों को समान मानता है। संविधान के लिए कोई देवता, कोई शूद्र नहीं है।