HINDUSTAN

कहाँ है साहब ! सबका साथ सबका विकास

नई दिल्ली- 2014 लोकसभा चुनाव के समय ‘सबका साथ सबका विकास’ का नारा देने वाली भाजपा सत्ता में आने के बाद इस नारे को भी लगता है भूल गई है। ऐसा लगता है कि और जुमलों की तरह यह भी मीडिया द्वारा गढ़ा एक चुनावी जुमला ही था। जब देश के उच्च पद पर विराजमान व्यक्ति को सरकार से भेदभाव की राजनीति से बचने की अपील करनी पड़े तो इससे बुरा और क्या हो सकता है।


देश के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने मोदी सरकार को मुस्लिम समाज के साथ सबका साथ सबका विकास जैसी भावना रखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि सरकार मुसलमानों के साथ भेदभाव न करे। उन्होंने कहा है कि भारतीय मुसलमानों को अपनी पहचान, सुरक्षा, शिक्षा एवं सशक्तीकरण बरकरार रखने में समस्या आ रही है जिसे सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए। इस समस्या को दूर करने के लिए सकारात्मक कदम उठाने की ज़रुरत है।


ऑल इंडिया मजलिस ए मुशावरात के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने मोदी सरकार के ‘सबका साथ सबका विकास’ को अच्छा कदम बताया और इसी की तर्ज पर मुस्लिमों की पहचान एवं सुरक्षा को मजबूत करने की मांग की है। इसके साथ ही केंद्र सरकार से भेदभाव की राजनीति से बचने की सलाह भी दी है।


आपको बता दें कि आज़ादी के बाद से भारत में शिक्षा, सुरक्षा, और रोजगार में मुसलमानों की हिस्सेदारी कम होती जा रही है। इसका मुख्य कारण धार्मिक भेदभाव को माना जाता रहा है। इस भेदभाव की वजह से दलितों के साथ मुसलमान भी मुख्यधारा में नहीं आ पाया है। जिससे आज के समय में मुसलमान शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि अनेक क्षेत्र में नगण्य दिखाई दे रहा है। जिसकी वजह से मुसलमानों की हालत भी दलितों की तरह हो गई है। जो अब काफी हद तक आरक्षण पर निर्भर हो गया है।