घोटाले से नहीं उभर पा रहा PNB, बैंक को जून तिमाही में हुआ 940 करोड़ का घाटा
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घोटाले से नहीं उभर पा रहा PNB, बैंक को जून तिमाही में हुआ 940 करोड़ का घाटा

गौरतलब है कि हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने इसी बैंक में घोटाला कर 13,417 करोड़  रुपये का चूना लगाया है।

देश के बैंकों की स्तिथि बिगड़ती जा रही है। देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक की सेहत में अभी भी सुधार नहीं नज़र आ रहा है। बैंक को जून तिमाही (अप्रैल से जून) में 940 करोड़ रुपयें का घाटा हुआ है।

जबकि पिछले साल इसी तिमाही में बैंक को 343 करोड़ रुपयें का लाभ हुआ था। गौरतलब है कि हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने इसी बैंक में घोटाला कर 13,417 करोड़  रुपये का चूना लगाया है।

इस घोटाले के बाद बैंक की स्तिथि ख़राब होती जा रही है। बैंक का सकल एनपीए (नॉन प्रॉफिट एसेट्स) जून में बढ़कर 18.26% के स्तर पर आ गया है। जबकि पिछले साल ये 13.66% था।

बढ़ता एनपीए भारतीय बैंकों की लगातार कमर तोड़ रहा है। एन.पी.ए बैंकों का वो लोन होता है जिसके वापस आने की उम्मीद नहीं होता। इस कर्ज़ में 90% से ज़्यादा हीस्सा उद्योगपतियों का है।

अक्सर उद्योगपति बैंक से कर्ज़ लेकर खुद को दिवालियाँ दिखा देते हैं और उनका लोन एन.पी.ए में बदल जाता है। यही उस लोन के साथ होता है जिसे बिना चुकाए नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग देश छोड़कर भाग जाते हैं।

लगातार सामने आ रहे बैंक घोटालों के चलते पिछले कुछ महीनों से बैंकों का घाटा बढ़ता जा रहा है। देश के 21 सरकारी बैंकों में से 14 को 2017-18 की चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च) में 42 हज़ार 043 करोड़ का घाटा हुआ है। इसमें आईडीबीआई बैंक का घाटा शामिल नहीं है।

सरकारी बैंकों के एनपीए में भी पिछले कुछ सालों में इसी तरह का बढ़ोतरी देखी गई है। रिज़र्व बैंक ने एक आरटीआई के जवाब में बताया कि जून 2017 के आखिरी में देश का एनपीए 9 लाख 50 हज़ार के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है। जबकि 2013-14 में ये 2 लाख 40 हज़ार करोड़ था। देश में लगभग 90% एनपीए सरकारी बैंकों का ही है।