अभी बैंकों का एक लाख करोड़ और डुबोकर जाएँगे मोदी, NPA कम करने में नाकाम हुई सरकार
BUSSINESS

अभी बैंकों का एक लाख करोड़ और डुबोकर जाएँगे मोदी, NPA कम करने में नाकाम हुई सरकार

मार्च 2018 तक, 6.6 लाख करोड़ रूपये के कई लोन की अदायगी लगातार नहीं हुई है।

नॉन परफोर्मिंग एसेट्स (एन.पी.ए) भारतीय बैंकों के लिए वर्तमान की सबसे बड़ी समस्यां बन चुका है। बैंक में बढ़ते बैंक घोटाले इसकी बड़ी वजह माने जा रहे हैं। आने वाले कुछ समय में एन.पी.ए में एक लाख करोड़ रूपये की रकम और जुड़ सकती है।

वर्तमान सरकार पर इसके लिए कई तरह के आरोप लग रहे हैं क्योंकि बैंक घोटालें और एन.पी.ए दोनों ही मोदी सरकार के कार्यकाल में पहले के मुकाबले बहुत ज़्यादा बढ़ गए हैं। सरकार पर इन कर्ज़ों की वसूली ना कर पाने और उद्योगपतियों का हिमायती बनने के भी आरोप लगे हैं।

एन.पी.ए बैंकों का वो लोन होता है जिसके वापस आने की उम्मीद नहीं होता। इस कर्ज़ में 90% से ज़्यादा हिस्सा उद्योगपतियों का है।

अक्सर उद्योगपति बैंक से कर्ज़ लेकर खुद को दिवालिया दिखा देते हैं और उनका लोन एन.पी.ए में बदल जाता है। यही उस लोन के साथ होता है जिसे बिना चुकाए नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग देश छोड़कर भाग जाते हैं।

'लाइवमिंट' ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है मार्च 2018 तक, 6.6 लाख करोड़ रुपये के कई लोन की अदायगी लगातार नहीं हुई है। इनमें से 3.1 लाख करोड़ रूपये के लोन को 'बैड लोन' (जो एनपीए भी बन सकते हों) के रूप में पहचाना जा सकता है।

'ट्रांस यूनियन सीआईबीआईएल' का मानना है कि कुछ महीनों में इनमें से 1.04 लाख करोड़ रुपये के लोन की एन.पी.ए बन जाने की संभावनाएं बहुत ज़्यादा हैं। इनमें से एक लाख करोड़ रुपये के लोन सरकारी बैंकों से हैं और बाकि निजी। जून तिमाही में जिस तरह के बैंक घाटों के आकड़े सामने आ रहे हैं उसे देखकर लगता है कि इसकी शुरुआत हो चुकी है।

लगातार सामने आ रहे बैंक घोटालों के चलते पिछले कुछ महीनों से बैंकों का घाटा बढ़ता जा रहा है। देश के 21 सरकारी बैंकों में से 15 को 2017-18 की चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च) में 47000 करोड़ से ज्यादा का घाटा हुआ है।

सरकारी बैंकों के एन.पी.ए में भी पिछले कुछ सालों में इसी तरह का बढ़ोतरी देखी गई है। रिज़र्व बैंक ने बताया है कि मार्च 2018 में एनपीए 10.40 लाख करोड़ पहुँच चुका है। जबकि 2013-14 में ये 2 लाख 40 हज़ार करोड़ था। देश में लगभग 90% एन.पी.ए सरकारी बैंकों का ही है।