RBI रिपोर्ट: नोटबंदी और GST भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए झटका, 9 लाख करोड़ का हुआ नुकसान
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RBI रिपोर्ट: नोटबंदी और GST भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए झटका, 9 लाख करोड़ का हुआ नुकसान

देश में 6 करोड़ 30 लाख एमएसएमई इकाईयां हैं। ये क्षेत्र देश की जीडीपी में 30% का योगदान देता है।

मोदी सरकार के दो बड़े आर्थिक क़दमों ने भारत की अर्थव्यवस्था और देश में रोज़गार को कितनी बड़ी क्षति पहुंचाई है ये बात एक आरबीआई रिपोर्ट में सामने आ गई है। नोटबंदी और जीएसटी ने देश के एमएसएमई यानि छोटे कारखानें और व्यापार को लाखों करोड़ रुपयें का नुकसान पहुँचाया है और बड़ी संख्या में लोगों को बेरोजगार किया है।

गौरतलब है कि देश में 6 करोड़ 30 लाख एमएसएमई इकाईयां हैं। ये क्षेत्र देश की जीडीपी में 30% का योगदान देता है। देश का 45% उत्पादन इन्ही एमएसएमई इकाईयों में होता है। निर्यात में इस क्षेत्र का 40% का योगदान है।

तो इस बात में कोई दो राय नहीं है कि ये क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है। और इसके हुए नुकसान को बड़ी आर्थिक तबाही देश के लिए कहा जा सकता है।

आरबीआई रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी और जीएसटी इस क्षेत्र के लिए एक के बाद एक बड़े झटके की तरह थे। उदाहरण देते हुए बताया गया है कि 97% एमएसएमई ज़्यादातर अनौपचारिक क्षेत्र में हैं मतलब शहरों की गलियों में चलने वाले कारखानें या व्यापार।

इस कारण नोटबंदी के कारण करोड़ों की संख्यां में काम कर रहे लोगों का वेतन देने के लिए नकदी की कमी पड़ गई।

इसके बाद बड़ी संख्या में शहरों में काम करने वाले लोग अपने गाँवों में वापस हो गए। इस कारण ही 'मनरेगा' में काम करने वालों की संख्या नोटबंदी के बाद बहुत ज़्यादा बढ़ गई थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि इसी तरह इस क्षेत्र की 60% इकाईयां जीएसटी की नई टैक्स व्यवस्था के लिए तैयार नहीं थी।

नुकसान का अंदाज़ा इंटरनेशनल फाइनेंस कोर्पोरेशन (आईएफसी) के इस आकलन से लगाया जा सकता है कि नोटबंदी और जीएसटी से पहले इस क्षेत्र में जो उत्पादन की मांग थी वो 370 बिलियन डॉलर थी।

जो इन दोनों आर्थिक झटकों के बाद 230 बिलियन डॉलर पर चली गई। मतलब 140 बिलियन डॉलर का नुकसान। इसे भारतीय मुद्रा में आका जाए तो लगभग 9 लाख करोड़ रुपियें का नुकसान मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को पहुँचाया।