क्या जस्टिस लोया को ‘सुप्रीम कोर्ट’ में भी नहीं मिलेगा इंसाफ ! मुख्य आरोपियों को क्लीनचीट देने का खेल चल रहा है क्या ?
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क्या जस्टिस लोया को ‘सुप्रीम कोर्ट’ में भी नहीं मिलेगा इंसाफ ! मुख्य आरोपियों को क्लीनचीट देने का खेल चल रहा है क्या ?

इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के कार्यरत जज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया, वो भी एक साथ चार जजों ने। इन जज़ों में जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ़ शामिल हैं।

क्या-क्या कहा?

जजों के इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से देश में हरकंप मचा दिया है। अपने आवास पर आयोजित इस प्रेस कांफ्रेंस में जस्टिस जे चेलमेश्वर ने कहा, “हम चारों इस बात पर सहमत हैं कि इस संस्थान को बचाया नहीं गया तो इस देश में या किसी भी देश में लोकतंत्र ज़िंदा नहीं रह पाएगा। स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका अच्छे लोकतंत्र की निशानी है।”

उन्होंने आगे कहा कि “मैं नहीं चाहता कि 20 साल बाद इस देश का कोई बुद्धिमान व्यक्ति ये कहे कि चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसेफ़ ने अपनी आत्मा बेच दी है।”

क्यों करना पड़ा प्रेस कॉन्फ्रेंस?

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने ने पूछा कि आखिर मामला क्या है, तो जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि उन्होंने अपनी बात एक खत में कह दी है। उस खत की कॉपी आपको मिल जाएगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस का जज लोया कनेक्शन

पूरा मामल क्या है इसका पता तो तब ही चल पाएगा जब जस्टिस चेलमेश्वर की चिट्ठी सार्वजनिक होगी। लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जजों ने कुछ बाते कहीं जिससे ये पता चलता है कि इस प्रेस कॉनफ्रेंस को करने की एक वजह जस्टिस लोया संदिग्ध मौत है। जस्टिस गोगोई ने ये बात कही भी कि जजों में विवाद की वजह जज लोया की संदिग्ध मौत का मामला भी है।

कल सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया की संदिग्ध मौत की मौत पर सुनावाई करने को तैयार हुई थी। आज चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने लोया की मौत की पर सुनवाई की। बेंच ने इस मामले को 15 जनवरी तक के लिए टाल दिया है।

क्या हो सकती है दूसरी वजह?

मीडिया में इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की एक और वजह बताई जा रही है। दरअसल नवंबर 2017 में जस्टिस चेलमेश्वर और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बीच एक केस के अलॉकेशन को लेकर कुछ विवाद हुआ था। ये मामला न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ा था।

जस्टिस कर्णन ने भी उठाया था आवाज

बता दें कि न्यायपालिका के भ्रष्टाचार का मामला इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायधीश कर्णन भी उठा चुके हैं।