CBI और सरकार से गुहार लगाती एक माँ को नहीं मिल रहा न्याय, क्या नजीब की मां ‘भारत माता’ नहीं है?
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CBI और सरकार से गुहार लगाती एक माँ को नहीं मिल रहा न्याय, क्या नजीब की मां ‘भारत माता’ नहीं है?

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय का छात्र नजीब पिछले एक साल चार महीने से गायब है। 15 अक्टूबर 2016 को जेएनयू कैंपस से नजीब अचानक गायब हो गया था या कर दिया गया था…पता नहीं।

हां इतना सबको पता है कि गायब होने से पहले नजीब और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस/झड़प हुई थी।

नजीब को ढूंढने को लेकर कितने आंदोलन और विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं लेकिन सीबीआई का रवैया बेहद असंवेदशील है। गत 26 फरवरी को भी नजीब की मां और छात्रसंघ ने मिलकर सीबीआई दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया था। लेकिन हर बार कि तरह इस बार भी नागरिकों के टैक्स से सैलरी लेने वाली पुलिस ने अफसरों के हुक्म पर प्रदर्शनकारियों खदेड़ भगाया।

भारत मां के वीर सपूतों ने नजीब की मां को फिर से सड़कों पर घसीटा। भारत मां के नाम पर उद्योगपतियों की तिजोरी भरने वाली सरकार को नजीब के मां के आंसू नहीं दिख रहें। ऐसे में सवाल उठना तो लाज़िम है कि आखिर ये ‘भारत माता’ है कौन?

जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार कुछ ऐसे ही सवाल उठाए हैं। कन्हैंया ने लिखा है कि सीबीआई मुख्यालय के सामने नजीब के मामले में ढुलमुल रवैये का विरोध कर रहे साथियों को पुलिस की हिंसा का सामना करना पड़ा।

क्या नजीब की माँ भारत की माताओं में शामिल नहीं हैं? अगर हैं तो जेएनयू के प्रशासन ने नजीब की गुमशुदगी के मामले में एफ़आईआर करने से क्यों मना कर दिया?

दिल्ली पुलिस ने घटना के लंबे समय बाद जेएनयू जाकर जाँच की खानापूर्ति क्यों की ? क्या इस समय में अहम सबूत ग़ायब नहीं हुए?

सीबीआई की जाँच एक इंच भी आगे क्यों नहीं बढ़ रही?

अपने बेटे के लिए इंसाफ़ माँगने वाली माँ को बार-बार सड़कों पर घसीटा क्यों जाता है ?

स्वपन दासगुप्ता, राम माधव जैसे लोगों ने सोशल मीडिया में नजीब को बदनाम करने वाली ग़लत ख़बरें क्यों फैलाईं?

जो सरकार इन सवालों से मुँह चुरा रही है, उसे आने वाले समय में मुँह की खाने के लिए तैयार हो जाना चाहिए।