‘नोटबंदी’ गरीबों को मारकर अरबपतियों का लोन माफ़ करने की स्कीम है, केजरीवाल का पुराना बयान वायरल
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‘नोटबंदी’ गरीबों को मारकर अरबपतियों का लोन माफ़ करने की स्कीम है, केजरीवाल का पुराना बयान वायरल

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 के पुराने नोटों के चलन को बंद कर दिया था। अचानक लिए इस फैसले के बाद बीजेपी सरकार की हर तरफ आलोचना होने लगी थी।

वहीं पुराने नोटों के बंद हो जाने के बाद बैंकों के बाहर लंबी-लंबी लाइने लग गई थी। 500 और 1000 नोटों को बदलने के लिए बैंकों के बाहर लगी भीड़ में कई लोगों की जान तक चली गई थी। लेकिन इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार की तरह से अजीब-अजीब जवाब मिले।

नोटबंदी के फैसले के बाद बीजेपी सरकार पर विपक्ष लगातार हमले करता रहा। वहीं नोटबंदी के दौरान बीजेपी के कई नेता करोड़ो रुपयों के साथ पकड़े भी गए थे। लेकिन इस पर भी बीजेपी की तरफ से किसी भी तरह का कोई बयान नहीं आया।

अब इन दिनों ट्विटर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के नोटबंदी के दिन किए गए ट्वीट के स्क्रीनशॉट को लोग रिट्वीट कर रहे हैं।

ट्वीट में लोग कहे रहे है कि केजरीवाल ने सही कहा था।

वहीं कुछ लोगों ने कहा कि, वोट तो गरीब जनता ने दिया था पर सरकार पूंजीपति चला रहे हैं.. गरीब के पैसों से अमीरों के लोन माफ हो रहे हैं।

बता दें कि नोटबंदी के समय केजरीवाल ने ट्वीट किया था कि, नोटबंदी आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला है। बड़े लोगों से पैसे खाकर आम जनता को भूखे लाइन में खड़ा किया। मोदी जी ने देश के साथ धोखा किया है।

वहीं कल बीजेपी के वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कैबिनेट की बैठक के बाद मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेस की जिसमें उन्होंने मीडिया को बताया कि किस तरह भारत ने पिछले तीन सालों में तेज गति से विकास किया है।

वित्त मंत्री ने बताया कि उन्होंने कहा थी कि पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े आने के बाद अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। पिछले कुछ सप्ताहों के अंदर अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार के भीतर काफी विश्लेषण हुआ। इसेक साथ ही वित्त मंत्रालय की प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक भी हुई।

देशभर में विपक्ष 8 नवंबर को काला दिवस मनाएंगा और विपक्ष अपने हिसाब से राज्यों में विरोध जताएगे। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि क्योकिं सभी दल लोकसभा और राज्यसभा में एक साथ इस मुद्दे को संसद में उठाते रहे है।

विपक्ष के प्रमुख दलों की बैठक में मोदी सरकार के नोटबंदी और जीएसटी के फैसले का विरोध करने की रणनीति बनाई गई है।