‘चंद्रशेखर आज़ाद’ जैसी दलित समाज की आवाज़ अगर ऐसे कुचल और दबा दी जाएगी तो कौन उठेगा लोगों के हक़ के लिए
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‘चंद्रशेखर आज़ाद’ जैसी दलित समाज की आवाज़ अगर ऐसे कुचल और दबा दी जाएगी तो कौन उठेगा लोगों के हक़ के लिए

5 मई को सहारनपुर के शब्बीरपुर में महाराणा प्रताप की शोभायात्रा निकाली गई थी। इस दौरान दलितों और ठाकुरों में भयानक जातीय संघर्ष हुआ। दलितों के पूरे मोहल्ले को आग के हवाले कर दिया गया। इस जातीय संघर्ष का स्वरूप इतना बड़ा हुआ कि ये राष्ट्रीय मुद्दा बन गया। इस राष्ट्रीय मुद्दे के केंद्र में जो नाम सबसे चर्चित रहा वो था ”चंद्रशेखर आज़ाद रावण”

दलितों का मसीहा बनकर उभरने वाला भीम आर्मी का संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ जो क्रांतिकारी शहीद चंद्रशेखर आजाद के अंदाज़ में मूंछों को ताव देता, ‘द ग्रेट चमार’ के बोर्ड के साथ छाती चौड़ी कर खड़े हुए और काला चश्मा लगाए बुलेट की सवारी करता था, आज वो अपने पैरों पर खड़ा भी नहीं हो पा रहा है। एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए व्हीलचेयर की जरूरत पड़ रही है।

अपने समाज को उसका हक और न्याय दिलाने के लिए अवाज बुलंद करने वाले चंद्रशेखर रावण की स्थिति इतनी खराब कैसे हो गयी ? वकालत का डिग्रीधारी चंद्रशेखर रावण साल 2011 तक टॉप लॉयर बनना चाहता था, इसके लिए वह अमेरिका जाकर आगे की पढ़ाई करना चाहता था लेकिन पिता की बीमारी के दौरान चंद्रशेखर ने जो जातिय दंश झेला उसने उसे चंद्रशेखर आज़ाद से चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’बना दिया।

लेकिन आज चंद्रशेखर की लड़ाई को समाज ने कमजोर कर दिया है, चंद्रशेखर को ऐसी हालत में पहुंचा दिया गया है कि वो वहां खुद की भी मदद नहीं कर पा रहा। ऐसे में सवाल उठता है कि जब एक राष्ट्रीय स्तर का नेता बन चुके दलित समाज के लड़के को समाज और सिस्टम निगल सकती है तो आम दलितों का क्या होता होगा? चंद्रशेखर जैसे पढ़े-लिखे, राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में रहने वाले लड़के को जब सिस्टम लाचार कर सकती है तो उस समाज के गरीब, खेतीहर, मजदूरों की क्या जिंदगी होगी? क्या चंद्रशेखर की हालत देखने के बाद कोई दलित-पिछड़ा वर्ग का व्यक्ति अपने ऊपर हो रहे अन्याय का विरोध कर पाएगा?

चंद्रशेखर की ऐसी हालत देखकर दलित चिंतक और वरिष्ठ पत्रकार दिलीप सी मंडल ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा कि ब्राह्मणवाद को मैं जब दुनिया की सबसे निर्मम, निष्ठुर, हिंसक और बर्बर विचारधारा कहता हूं तो मेरे दिमाग में कुछ ऐसी ही छवियां होती हैं। सहारनपुर में हमला दलितों पर हुआ, घर उनके जले, आग में मवेशी उनके मरे, लेकिन हमलावर सब बाहर हैं।’

सहारनपुर हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता शेर सिंह राणा खुलेआम घूम रहा और आरक्षण विरोधी सभाएं कर रहा है। लेकिन दलितों के लिए स्कूल खोलने वाले और शिक्षा को प्रगति का रास्ता बनाने वाले एडवोकेट भाई चंद्रशेखर रावण जेल में हैं। उनके इलाज का सही बंदोबस्त नहीं है। जेल के अंदर उनपर हमला होता है। गंभीर हालत में उनकी एक तस्वीर सामने आई है। ब्राह्मणवाद इतना हिंसक हो सकता है।

ब्राह्मणवाद में दया या इंसानियत जैसे शब्दों के लिए कोई जगह नहीं है। अगर आप ब्राह्मणवाद को चुनौती देंगे, तो आपको कुचल दिया जाएगा। लेकिन इससे भी खतरनाक बात यह है कि आपको अपने ही लोगों से अलग-थलग करके विलेन बना दिया जाएगा और आपके लोग आपको विलेन मान भी लेंगे।

बता दें कि सहारनपुर के जेल में बंद चंद्रशेखर रावण पर पर बलवा और दंगा कराने और पुलिस पर हमले का नेतृत्व करने के गंभीर आरोप हैं। हालांकि गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चंद्रशेखर को सभी चार मामलों में ज़मानत दे दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चंद्रशेखर रावण सोमवार को जेल से बाहर आ जाएंगे।

बीबीसी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक चंद्रशेखर के पेट में इंफ़ेक्शन हो चुक हैं। चंद्रशेखर के भाई बीबीसी से बात करते हुए कहते हैं, “आप जानते हैं इस समय यूपी में किसकी सरकार है और जो चंद्रशेखर के साथ हो रहा है उसके पीछे कौन है।”

वहीं भीम आर्मी के प्रवक्ता कल्याण सिंह सवाल उठाते हैं, “चंद्रशेखर के इलाज में लापरवाही की जा रही है जिससे ज़ाहिर होता है कि उनका इरादा ख़राब है। ” कल्याण सिंह कहते हैं, “हमें सिर्फ़ पेट के इंफ़ेक्शन के बारे में ही बताया गया है। टायफ़ाइड की क्या स्थिति है ये जानकारी नहीं दी गई है। यदि टायफ़ाइड पूरी तरह ठीक न हो तो ख़तरनाक भी हो सकता है।”

कल्याण सिंह चंद्रशेखर का इलाज मेरठ या दिल्ली से कराने की मांग कर रहे हैं। कल्याण सिंह का कहना है कि, “चंद्रशेखर की चिकित्सकीय जांच होनी चाहिए और उनकी बीमारी के बारे में पूरी जानकारी देनी चाहिए। यदि प्रशासन को सहारनपुर में चिकित्सकीय जांच कराने में दिक्क़त है तो उन्हें मेरठ या दिल्ली के अस्पताल ले जाया जाना चाहिए।”