मोदीभक्त था प्रकाश पाण्डेय ! जब ‘भक्त’ जान दे रहे हैं तो किसान, गरीब, मजदूरों इन सबका क्या हाल हो रहा होगा ?
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मोदीभक्त था प्रकाश पाण्डेय ! जब ‘भक्त’ जान दे रहे हैं तो किसान, गरीब, मजदूरों इन सबका क्या हाल हो रहा होगा ?

बीते शनिवार हल्द्वानी के ट्रांसपोर्टर प्रकाश पाण्डे ने देहरादून में बीजेपी के कार्यालय में जन सुनवाई के दौरान ज़हर खा लिया था। जीएसटी और नोटबंदी से परेशान प्रकाश पाण्डे ने भाजपा नेताओं के सामने जहर खाया था जिसके बाद मंगलवार को अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

लेकिन आपको बता दें कि जीएसटी और नोटबंदी से परेशान प्रकाश पाण्डे नरेन्द्र मोदी के बहुत बड़े समर्थक थे। उनके बारे में सोशल मीडिया पर छान बिन करने पर साफ़ पता लगता है कि वो कितने बड़े मोदी भक्त थे।

लेकिन फिर भी उन्होंने अपनी मौत का कारण जीएसटी और नोटबंदी बताया। इससे ये अनुमान लगाया जा सकता है कि सिर्फ आम जनता और किसान ही नहीं बल्कि मोदी भक्त भी मोदी सरकार के जीएसटी और नोटबंदी के फैसले से परेशान है।

हम जब प्रकाश पाण्डे के फेसबुक पर गए तो हमे उनका एक साल पुराना पोस्ट दिखा। जिसमें वो प्रधानमंत्री के नोटबंदी के फैसले को समर्थन करते दिखे।

उन्होंने लिखा, “आदरणीय प्रधानमंत्री जी, आज नोटबंदी से ट्रांसपोट का कारोबार खत्म हो गया है। आपसे निवेदन है कि बैँको और प्राइवेट फाईनैसं कंपनी को निर्देश दें कि किसी भी उपभोक्ता की किस्त टूटने पर उसकी गाड़ी ना बंद करें। और वाहन मालिको को परेशांन ना करें। नोटबन्दी मैं हम सब आपके साथ हैं।”

मोदीभक्त था प्रकाश पाण्डेय ! जब ‘भक्त’ जान दे रहे हैं तो किसान, गरीब, मजदूरों इन सबका क्या हाल हो रहा होगा ?

प्रकाश पण्डे के इस पोस्ट से ये पता लगता है कि वो प्रधानमंत्री मोदी की राजनीति को पसंद करते थे। प्रकाश पांडे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति और उनके फ़ैसलों में भरोसा था। उन्होंने फ़ेसबुक पर ऐसे कई पोस्ट किए हैं जिनमें उन्होंने प्रधानमंत्री की सराहना की है।

मगर धीरे धीरे जीएसटी और नोटबंदी की मार से प्रकाश पाण्डे के कारोबार पर भी असर पड़ने लगा लेकिन इस बात को उन्होंने कभी जाहिर नहीं होने दी।

उन्होंने फरवरी 2017 में वितमंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखा। ज़िसमें उन्होंने सरकार से ट्रक और बस मालिक के लिये कोई ठोस पोलिसी बनाने को कहा। उस पत्र में उन्होंने नोटबंदी से हो रही परेशानियों का जिक्र भी किया था।

मोदीभक्त था प्रकाश पाण्डेय ! जब ‘भक्त’ जान दे रहे हैं तो किसान, गरीब, मजदूरों इन सबका क्या हाल हो रहा होगा ?

प्रकाश पाण्डे की परेशानिया अब बड़ी होती जा रही थी और उनका कारोबार बंद होने के कगार पर आ चुका था।

उस दौरान 22 नवम्बर को उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट और डाला जिसमे उन्होंने मोदी सरकार से गुहार लगाते हुए लिखा, “मुख्यमंत्री जी, कुछ तो करो। काम धंधा चौपट है। विभागों में पैसा नहीं है। विकास गायब है। पार्टी के लोगों का ही काम नहीं हो पा रहा है तो हमे कौन पूछेगा। आपके लोग फोटो पोस्ट करने में बिजी हैं। अभी भी वक्त है बाद में बोलने का समय नहीं मिलेगा।”

मोदीभक्त था प्रकाश पाण्डेय ! जब ‘भक्त’ जान दे रहे हैं तो किसान, गरीब, मजदूरों इन सबका क्या हाल हो रहा होगा ?


इस पोस्ट से प्रकाश पाण्डेय ने ये संकेत दे दिए कि सरकार ने अगर जल्द ही कुछ नहीं किया तो वो कुछ कर बैठेंगे। और हुआ वही महज दो महीने बाद नए साल पर उन्होंने बीजेपी के कार्यालय में जन सुनवाई के दौरान ज़हर खा लिया।

प्रकाश पाण्डे की मौत बहुत से सवाल खड़े करती है क्योंकि आज तक सिर्फ किसान, गरीब और मजदूर ही नोटबंदी और जीएसटी का विरोध करते थे। ये पहला मौका है जब किसी मोदी समर्थक ने सरकार की इन् नीतियों पर विरोध जताते हुए अपनी जान दे दी है।

सरकार के इन् दोनों फैसलों का विरोध होता आ रहा है मगर सरकार ने अभी तक रहत के लिए कुछ भी नहीं किया।