क्या संघ के स्वयंसेवक से मुख्यमंत्री बने देवेंद्र फडणवीस ‘ट्रांसजेंडर’ सोनाली दलवी की मदद करेंगे?
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क्या संघ के स्वयंसेवक से मुख्यमंत्री बने देवेंद्र फडणवीस ‘ट्रांसजेंडर’ सोनाली दलवी की मदद करेंगे?

सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में एक ऐतिहासिक फैसले में ट्रांसजेंडर्स को ‘थर्ड जेंडर’ के रूप में मान्यता दी थी। संविधान के आर्टिकल 14, 16 और 21 का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ट्रांसजेंडर देश के नागरिक हैं।

जब सुप्रीम कोर्ट मानता है कि ट्रांसजेंडर देश के नागरिक है तो कोई शॉपिंग मॉल इनसे भेदभाव कैसे कर सकता है। मामला महाराष्ट्र के पुणे का है जहां ट्रांसजेंडर्स एक शॉपिंग मॉल में घुसने नहीं दिया गया। मॉल के मेन गेट पर ही सिक्योरिटी गार्ड्स ने ट्रांसजेंडर सोनाली दलवी और उनके दोस्त को रोक दिया।

सवाल उठता है कि क्या राज्य की फडणवीस सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू नहीं कर पायी है? कायदे से इस तरह के भेदभाव के खिलाफ फडणवीस सरकार को सोनाली दलवी की मदद करनी चाहिए। क्या संघ के स्वयंसेवक से मुख्यमंत्री बने देवेंद्र फडणवीस ट्रांसजेंडर सोनाली दलवी की मदद करेंगे?

मामला गुरूवार का है जब सोनाली दल्वी अपने एक दोस्त के साथ पुणे के नामी फीनिक्स मार्केट सिटी मॉल गई थीं। सोनाली के मुताबिक, सिक्योरिटी गार्ड्स ने यह कहते हुए उन्हें मॉल में घुसने नहीं दिया गया कि मॉल की नीति के अनुसार, वहां ट्रांसजेंडर्स को प्रवेश की अनुमति नहीं है।

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सोनाली ने जब सिक्योरिटी ऑफिसर्स से मॉल की इस तरह की पॉलिसी से संबंधित दस्तावेज मांगे तो उन्हें किसी तरह का दस्तावेज भी नहीं दिखाया गया। सिक्योरिटी ऑफिसर्स के इस रवैये से ये साबित होता है कि तमाम जागरूकता अभियानों के बावजूद ट्रांसजेंडर्स के प्रति समाज की सोच नहीं बदल रही है।

बता दें कि सेक्स चेंज करा लड़का से लड़की बनीं सोनाली दल्वी ने अपने खिलाफ हुए भेदभावपूर्ण रवैये के लिए मॉल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का फैसला किया है।