मोदी सरकार नहीं चाहती PNB घोटाले की जांच करे SC, कहा- कोर्ट नहीं कर सकता समानांतर जांच
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मोदी सरकार नहीं चाहती PNB घोटाले की जांच करे SC, कहा- कोर्ट नहीं कर सकता समानांतर जांच

केंद्र की मोदी सरकार नहीं चाहती कि पंजाब नेशनल बैंक घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से साफ कहा कि पीएनबी घोटाले की “समानांतर जांच”” और “समानांतर निगरानी”” नहीं की जा सकती। सवाल ये है कि मोदी सरकार कोर्ट की निगरानी में जांच कराने से भाग क्यों रही है?

बता दें, कि पीएनबी बैंक में 12,600 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। एक टीवी चैनल ने घोटाले से जुड़े दस्तावेज़ों के आधार पर इस घोटाले को 29000 करोड़ रुपये का बताया है। इस घोटाले में आरोपी हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उनके मामा मुहल चौकसी हैं। घोटाला सामने आने से पहले ही ये दोनों पूरे परिवार के साथ देश छोड़कर भागने में कामयाब हो गए।

नीरव मोदी देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी के रिश्तेदार हैं। मुकेश अंबानी को मोदी सरकार का करीबी माना जाता है। हाल ही में स्विटज़रलैंड के दावोस शहर में हुए वर्ल्ड इकनोमिक फोरम की बैठक में नीरव मोदी को भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ देखा गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया था कि इस मामले में सीबीआई को सीलबंद लिफाफे में अपनी जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी चाहिए लेकिन केंद्र सरकार ने इसका विरोध किया।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि अदालतों में समानांतर जांच व निगरानी नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट ही नहीं, किसी भी कोर्ट द्वारा सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगने का कोई औचित्य है? क्या यहां समानांतर जांच चल रही है?

अटॉर्नी जनरल ने ये बातें वकील विनीत ढांडा द्वारा दायर याचिका का विरोध करते हुए दी। ढांडा ने याचिका में पीएनबी घोटाले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। साथ ही घोटाले के मुख्य आरोपित नीरव मोदी को दो महीने में भारत वापस लाने और बैंकों द्वारा बड़े कर्ज देने की नई गाइडलाइन बनाने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग की गई है।