मौत के बाजीगरों को अगर ‘जस्टिस लोया’ के बेटे से क्लीनचिट नहीं मिली तो वो उनकी ‘आत्मा’ से प्रेस कांफ्रेंस करा देंगे
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मौत के बाजीगरों को अगर ‘जस्टिस लोया’ के बेटे से क्लीनचिट नहीं मिली तो वो उनकी ‘आत्मा’ से प्रेस कांफ्रेंस करा देंगे

रविवार के दिन मुंबई में दिवंगत न्यायाधीश बीएच लोया के बेटे अनुज लोया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। अनुज लोया ने मीडिया के सामने कहा कि ‘मुझे किसी पर शक नहीं इसलिए मुझे इस मामले में जांच की जरूरत ही नहीं है।’

अनुज ने कहा, ‘मैं भावनात्मक उथल-पुथल के गिरफ्त में था, अतएव मेरे मन में उनकी मृत्यु को लेकर संदेह था। लेकिन, अब मेरे मन में उनकी मौत के तरीके को लेकर कोई संदेह नहीं है।’

अनुज के इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सोशल मीडिया पर कई सवाल उठने लगे हैं। लोगों के प्रतिक्रिया के मुताबिक, अनुज ने ये प्रेस कॉन्फ्रेंस किसी दबाव में किया है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर कई तरह के संदेह सामने आ रहे हैं।

राज्यसभा टीवी के पत्रकार दिलीप खान अपने फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि ”अनुज लोया को दो खुर्राट लोगों ने घेर रखा था। सहमे हुए संकोच में जब अनुज ये कह रहा था कि उसे अब कोई शक नहीं है, तो उसकी आंखें इस बात को मंजूरी नहीं दे रही थी।

एक वकीलनुमा जीव हमारे सामने इस दौर का प्रहसन लिख रहा था और प्रेस कांफ्रेंस के ज़रिए वो इस मुल्क के सबसे शक्तिशाली लोगों में शुमार एक ऐसे व्यक्ति को अथॉरिटी के साथ क्लीनचिट दे रहा था, जैसे पीसी नहीं अदालत हो।

वकील के दाहिने तरफ़ बैठा व्यक्ति कह रहा था कि प्रेस कांफ्रेंस से पहले “अमित शाह से संपर्क” किया गया। मनीष शांडिल्य के कहने पर ग़ौर किया तो साउंड अमित शाह नहीं, “अमित सर” निकला। शायद उस वकील का नाम अमित हो। यानी, अमित सर की अगुवाई में अमित शाह को क्लीनचिट बांटा जा रहा है!

बेटे को बैठाना मजबूरी थी नहीं तो अमित सर अकेले चिल्लाकर बोल देते।

अब अगर इस मुल्क में किसी की हत्या हो जाए तो पुलिस, जांच एजेंसियों, अदालतों के काम-काज को मुल्तवी कर, परिजनों को पीसी में जबरन बैठाकर हत्यारे या हत्या के आरोपी या जिस पर हत्या का शक है, उसे बाइज़्ज़त बरी करने का प्रावधान लिख देना चाहिए।

कल की पीसी से जस्टिस लोया की हत्या की बात और पुष्ट हुई है। फ़िल्मों में इंटरवल से पहले अमरीश पुरी के खिलाफ़ कोई नहीं बोलता।”

दिलीप खान ने अपने दूसरे फेसबुक पोस्ट में लिखा कि ”जस्टिस लोया को लेकर परिजनों के दो बयान आए। बहन ने अमित शाह पर बेहद संगीन आरोप लगाए थे। मीडिया में वो रत्ती भर नहीं चला।

लाव-लश्कर के साथ कल एक वकीलनुमा जीव जस्टिस लोया के बेटे अनुज को लेकर पीसी में बैठ गया। सहमे हुए बेटे से एक लाइन कहलवा दी कि उसे हत्या का शक नहीं है। समूचा मीडिया तानपूरा बजाने लगा। इस देश में टीवी वालों से ज़्यादा कमजर्फ़ और कुपढ़ क़ौम कोई नहीं है।”

पत्रकार भावेंद्र प्रकाश लिखते हैं कि ”जस्टिस लोया के बेटे से बात नहीं बनी तो ये बाजीगर जस्टिस लोया की आत्मा से भी प्रेस कांफ्रेंस करा देंगे!”

अजय यादव लिखते हैं कि ”जज लोया के बेटे ने पिता की मौत पर कहा-‘किसी पर कोई शक नहीं’ लेकिन यह कहते हुए वो इतना खोया-खोया क्यों था? उसकी नजरें झुकी-झुकी क्यों थी? तीन लाइन का बयान इतने भटक और हिचक से क्यों गुजरा?
आख़िर बेटे के बयान का नतीजा किसी भी “जांच से किया इनकार” ही क्यों निकला?”

पत्रकार अरविंद शेष लिखते हैं कि ”दिलचस्प यह है कि बचाव की हड़बड़ी में लोया के बेटे की सफाई के बावजूद अब कोई औसत आदमी भी यह समझ पा रहा है कि कुछ तो बड़ी गड़बड़ है! अब वह औसत आदमी भी समझ पा रहा है कि जब घपला दबाए नहीं दब रहा है तो दूसरे लाचार किए गए लोगों का सहारा लेकर सरकार का चेहरा साफ बताने की झूठी कोशिश हो रही है!

जैसे-जैसे संघियों की प्रतिक्रिया की हड़बड़ी सामने आ रही है, वैसे-वैसे इसके मूर्ख समर्थकों का दम टूट रहा है! अब उसके लिए यह कह पाना मुश्किल हो रहा है कि सब ठीक है…!”

वही इस मामले में समाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार कहते हैं कि ”जस्टिस लोया की हत्या के मामले में भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह को बचाने के लिए जस्टिस लोया के बेटे से आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कराई गई है। ये तो कोई बच्चा भी समझ सकता है कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में करवाई गई है।

भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह द्वारा करी गई हत्या को दबाने के लिए पहले तो सुप्रीम कोर्ट के जज मिश्रा द्वारा कोशिश करी गई लेकिन जब 4 जजों ने उसके खिलाफ प्रेस कान्फ्रेंस करी। अब भाजपा जज लोहिया के नाबालिग बेटे के मार्फत इस मामले को दबाना चाहती है।

मुझे इस तरह के बहुत सारे मामलों का व्यक्तिगत अनुभव है। छत्तीसगढ़ में पुलिस द्वारा करी गई कई हत्याओं के मामलों में
हम मामलों को कोर्ट में ले गए तो सरकार ने आवेदनकर्ताओं और गवाहों का अपहरण किया और फिर उनसे अपने पक्ष में झूठे बयान दिलवा दिए। और खुद को बचा लिया।

भारत में धमकियां देकर गवाह तोड़ना, अपने पक्ष में बयान बदलवाना, डराना, धमकाना रोजमर्रा का काम है। लेकिन साहिर ने लिखा है खून खुद देता है ज़ल्लादों के मस्कन का सुराग अमित शाह इस मामले में आज नहीं तो कल फंसेगा जरूर।”