देश संविधान से चलता है संघ के विधान से नहीं, सरहद की सुरक्षा वीर ‘सैनिकों’ से होती है ‘संघियों’ से नहीं : कन्हैया
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देश संविधान से चलता है संघ के विधान से नहीं, सरहद की सुरक्षा वीर ‘सैनिकों’ से होती है ‘संघियों’ से नहीं : कन्हैया

मोहन भागवत ने ज़रूरत पड़ने पर तीन दिन में अपने संगठन के लोगों को बॉर्डर पर तैनात करने की बात कही। उन्हें बता दूँ कि जिस देश में रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या हो जाती है, उसे सबसे ज़्यादा ख़तरा उन लोगों से है जो संस्कृति की आड़ में जातिवाद, सांप्रदायिकता आदि का ज़हर स्कूल की किताबों के पन्नों में भी भरने के काम में लगे रहते हैं।

आज अगर अपराधी बिना किसी डर के किसी भी व्यक्ति को सबके सामने निर्मम तरीके से मार देते हैं तो इसका कारण यह है कि उन्हें कानून का कोई डर नहीं है। यूपी में कानून की पढ़ाई कर रहे छात्र दिलीप सरोज को बेरहमी से मार दिया गया।

हत्यारों को कुछ भी करके बचकर निकल जाने का आत्मविश्वास कहाँ से मिलता है? जिन लोगों पर रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या का आरोप है, उनके ख़िलाफ़ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

जिस व्यक्ति पर अख़लाक़ की हत्या का आरोप है, उसके अंतिम संस्कार में भाजपा के लोग शामिल हुए। भाजपा के विनय कटियार मुसलमानों को भारत से चले जाने की बात कहने के बावजूद सांसद बने हुए हैं।

यह संविधान के मूल्यों का अपमान नहीं है तो और क्या है? देश में लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए संविधान पर होने वाले हर हमले को लेकर हमें उतना ही सजग-चौकस होना होगा, जितना हम बॉर्डर पर होने वाले हमले के समय होते हैं।

देशभक्ति यह होती है कि हम अपने हर काम में समाज के सबसे कमज़ोर तबकों के हितों को ध्यान में रखें। आरएसएस तो दंगा कराने, अंधविश्वास बढ़ाने, दलितों और अल्पसंख़्यकों को आतंकित करने जैसे कामों में लगा रहता है। आज़ादी की लड़ाई के समय हाथ पर हाथ धरे बैठे लोग आज बॉर्डर पर जाने की बात कह रहे हैं।

मोहन भागवत जी, आपकी शाखा के लोग दंगा कर सकते हैं, देश की रक्षा नहीं। देश संविधान से चलता है, संघ के कानून से नहीं। आप देश में ज़हर घोलने का चाहे कितना भी प्रयास कर लें, भारतीय सेना बाहर के दुश्मनों से निपट लेगी और ‘हम, भारत के लोग’ संविधान की हत्या करने की कोशिश कर रहे आप जैसे अंदरूनी दुश्मनों को कामयाब नहीं होने देंगे।

(कन्हैया कुमार के फेसबुक वॉल से साभार)