देश में न ‘दलितों’ को न्याय न ‘बाबा साहब’ का सम्मान, अब योगी सरकार ने सरकारी अस्पताल से हटाया ‘बाबा अम्बेडकर’ का नाम
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देश में न ‘दलितों’ को न्याय न ‘बाबा साहब’ का सम्मान, अब योगी सरकार ने सरकारी अस्पताल से हटाया ‘बाबा अम्बेडकर’ का नाम

देश में दलितों के क्या हालत हैं ये किसी से छिपा नहीं है। एक जनवरी से सात जनवरी यानी साल के शुरूआती 7 दिनों में 7 सफाईकर्मियों की गटर/नालों में मौत हो चुकी है। साल के पहले दिन पुणे में दलितों पर हमला किया जाता है। मीडिया दलितों पर हुए हमले को दलित बनाम हिंदू बताकर दिखाती है।

देशभर में लगाए गए डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति को खंडित करने का अभियान चलाया जा रहा है। सत्ताधारी भगवा नेता दलितों से मिलने से पहले साबुन भिजवाते हैं। इस देश में दलितों के साथ हो रहे अन्याय की लिस्ट बहुत लम्बी है। मौजूदा बीजेपी सरकार दलितों के साथ-साथ उनके नेता और महापुरूषों का भी उपहास कर रही है।

बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर 30 स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का नाम बदलकर अब राजकीय संयुक्त जिला चिकित्सालय कर दिया गया है। शनिवार को नए नाम का बोर्ड भी अस्पताल में लगा दिया गया। अब इस अस्पताल को अप्रैल में राज्य सरकार टेक ओवर भी करने जा रही है। अभी तक जिला अस्पताल को चलाने की जिम्मेदारी नोएडा प्राधिकरण के हवाले थी।

करोड़ों की लागत से बना यह अस्पताल प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में संचालित किया गया था। वर्ष 2012 में बसपा की जगह समाजवादी पार्टी की सरकार आ गई, लेकिन इस नाम से छेड़छाड़ नहीं की गई।

अब 2017 में योगी सरकार बनने के बाद डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम हटाकर इसे सीधे राजकीय जिला संयुक्त चिकित्सालय कर दिया गया है।

बीजेपी के पोस्टर बॉय और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी भाषणों में डॉ. भीमराव अंबेडकर का जिक्र करना नहीं भूलते। पीएम मोदी ऐसा इसलिए भी करते हैं क्योंकि अंबेडकर को मानने वालों की संख्या इस देश में सबसे अधिक है। वोट बैंक के नजरिए से देखे तो पीएम मोदी द्वारा अंबेडकर का नाम लेना मजबूरी भी है।