खुला खत : फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों, आप मुंबई चले आइये- इसी बहाने PM मोदी भी किसानों की सुध ले लेंगे
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खुला खत : फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों, आप मुंबई चले आइये- इसी बहाने PM मोदी भी किसानों की सुध ले लेंगे

भारत के चार दिवसीय दौरे पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के नाम पत्र

प्रिय,

फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों

आप भारत के चार दिवसीय दौरे पर हैं। अगर आपको असली भारत देखना है तो कृप्या थोड़ा वक्त निकाल कर मुंबई आ जाइए। आपके आने की वजह से हमारे प्रधानमंत्री को भी मजबूरन मुंबई आना पड़ेगा और 35,000 किसानों का शायद भला हो जाएगा।

दरअसल देश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाली मुंबई में 35,000 किसान इकट्ठा हैं। ये किसान अपनी मांग को सरकार के सामने रखने के लिए 200 किलोमीटर पैदल चलकर आए हैं। 6 मार्च से किसानों ने अपनी ये यात्रा महाराष्ट्र के नासिक से शुरू की थी। आज 12 मार्च को 6 दिन लगातार पैदल चलने के बाद किसान मुंबई पहुंच चुके हैं।

लेकिन हमारे देश के प्रधान सेवक उर्फ चौकीदार नरेंद्र मोदी आपके और परिवार के आवभगत फुर्सत ही नहीं है। आपकी कानों तक 35,000 किसानों की वेदना न पहुंचे इसलिए हमारे पीएम आपको वाराणसी लेकर चले गए हैं। वहां आपके स्वागत में वैदिक मंत्रोच्चार और शहनाई वादन कि व्यवस्था ही इसलिए की गई ताकि आपको आत्महत्या को मजबूर होने वाले किसानों की चीखें सुनाई न दें।

200 किलोमीटर पैदल चलकर आए इन किसानों का पैर फट चुका है। पैरों से खून निकल रहा है। फोटो देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

राष्ट्रपति मैक्रों आपकी छवी दुनिया भर में एक उदारवादी नेता के रूप में है। अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप की जीत के बाद दुनिया भर में दक्षिणपंथी राजनीति के उभार को लेकर जब चिंताएं हो रही थीं, उस वक्त आपकी जीत ने दुनिया भर को राहत की सांस दी।

आपने तो चुनाव ही अपने यहां के दक्षिणपंथी संगठनों को हरा कर जीता है। आपको सीमाएं खुली रखने वाला, ग्लोबलाइजेशन का समर्थक, धार्मिक स्वतंत्रता और सहिष्णुता का समर्थक समझा जाता है। अगर आप थोड़ी सहिष्णुता हमारे पीएम मोदी को भी सीखा दें तो बहुत मेहरबानी होगी।

राष्ट्रपति मैक्रों मैं आपसे पूछना चाहता हूं क्या आप अपने अन्नदातों की मांग को दरकिनार कर किसी नेता की खातिरदारी में लग सकते हैं ? जैसे हमारे पीएम मोदी लगे हुए हैं। क्या आप भी अपने किसानों, मजदूरों को तड़पता छोड़ किसी नेता की मेहमान नवाजी कर सकते हैं?

हमारे पीएम आपके साथ हंस रहे, खेल रहे हैं और दूसरी तरफ 35,000 किसान पिछले 6 दिनों से दिनरात सड़कों पर बिलख रहे हैं। इन किसानों की मांग को अगर नहीं सुना गया तो इनके पास आत्महत्या के सिवा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

पीएम मोदी हर छोटी-छोटी बातों पर ट्वीट कर दुनिया को अपना अहसास दिलाते रहते हैं लेकिन 35,000 किसान की 200 लंबी पदयात्रा पर एक ट्वीट तक नहीं किया। राष्ट्रपति मैक्रों क्या आप भी अपने किसानों, मजदूरों के साथ ऐसा करते?

आंदोलन कर रहे किसानों की पहली मांग पूरे तरीके से कर्जमाफी है। बैंकों से लिया कर्ज किसानों के लिए बोझ बन चुका है। मौसम के बदलने से हर साल फसलें तबाह हो रही है। ऐसे में किसान चाहते हैं कि उन्हें कर्ज से मुक्ति मिले।

राष्ट्रपति मैक्रों शायद आपको पता नहीं कि हमारे देश से उधोगपति 11,345 करोड़ रूपए लेकर विदेश भाग जाते हैं लेकिन किसानों के 10,000 के लोन के लिए उनका घर जब्त कर लिया जाता है।

आंदोलन कर रहे किसानों की मांग है कि महाराष्ट्र के ज्यादातर किसान फसल बर्बाद होने के चलते बिजली बिल नहीं चुका पाते हैं। इसलिए उन्हें बिजली बिल में छूट दी जाए।

फसलों के सही दाम न मिलने से भी वो नाराज है। सरकार ने हाल के बजट में भी किसानों को एमएसपी का तोहफा दिया था, लेकिन कुछ संगठनों का मानना था कि केंद्र सरकार की एमएसपी की योजना महज दिखावा है। किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें भी लागू करने की मांग किसान कर रहे हैं।