दलित महिला ग्राम-प्रधान को नहीं फहराने दिया तिरंगा, प्रिंसिपल बोला- न आज तक हुआ है न अब होने दूंगा
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दलित महिला ग्राम-प्रधान को नहीं फहराने दिया तिरंगा, प्रिंसिपल बोला- न आज तक हुआ है न अब होने दूंगा

भारत अपना 72वां स्वतंत्रता दिवस मना चुका है। लेकिन देश के दलित आज भी शोषण और अपमान झेल रहे हैं

भारत अपना 72वां स्वतंत्रता दिवस मना चुका है। लेकिन देश के दलित आज भी शोषण और अपमान झेल रहे हैं। आलम ये है कि दलित समाज के लोगों को आज भी राष्ट्रध्वज तक नहीं छूने दिया जा रहा है।

बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में एक दलित महिला ग्राम प्रधान को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर झंडा फहराने से रोक दिया गया।

दरअसल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दलित महिला ग्राम प्रधान अपने गांव के प्राथमिक स्कूल पर झंडा फहराने पहुंची। लेकिन स्कूल के जातिवादी प्रिंसिपल ने उन्हें झंडा फहराने से रोक दिया।

महाराजगंज के बृजमनगंज ब्लॉक के महुआरी गांव की आरक्षित सीट से चुनाव जीत रीता देवी प्रधान निर्वाचित हुई हैं। उत्तर प्रदेश में नियम है कि ग्राम प्रधान गांव के प्राथमिक स्कूल में झंडा फहराएगा। इसी नियम के तहत रीता देवी झंडा फहराने गयी थीं। लेकिन उन्हें उनकी जाति की वजह से रोक दिया गया।

दलित दस्तक की रिपोर्ट के मुताबिक, रीता देवी का कहना है कि 'जब मैं स्कूल पहुंची तो सवर्ण जाति से ताल्लुक रखने वाले प्रिंसिपल ने मुझे रोक दिया। और मेरे हाथ से तिरंगा की डोर लेकर खुद झंडारोहण किया।'

जिस समय यह घटना घटी उस समय स्कूल में छात्र और अभिभावक भी मौजूद थें। उन्होंने जब प्रिंसपल के इस रवैये को गलत ठहराते हुए विरोध किया तो प्रिंसिपल का कहना था कि स्कूल में आज तक कोई भी दलित झंडा नहीं फहराया इसलिए रीता देवी भी नहीं कर सकती।