जय जवान-जय किसान का नारा बुलंद करने ‘लाल बहादुर शास्त्री’ को भूली भाजपा सरकार, कोई नहीं पहुंचा श्रद्धांजलि देने
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जय जवान-जय किसान का नारा बुलंद करने ‘लाल बहादुर शास्त्री’ को भूली भाजपा सरकार, कोई नहीं पहुंचा श्रद्धांजलि देने

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर नेताओं का एक अलग रूप देखने को मिला है। सरकार और विपक्ष दोनों का कोई भी बड़ा नेता दिल्ली के विजय घाट पर स्थित शास्त्री मेमोरियल पर उन्हें श्रद्धांजलि देने नहीं पंहुचा।

दिल्ली के इस कड़ाके की ठंड और डिजिटल इंडिया को मद्दे नज़र रखते हुए नेताओ ने ट्विटर के ज़रिये लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि देकर अपना कर्त्तव्य पूरा किया।

भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री के पुण्यतिथि पर किसी भी नेता का विजय घाट न पहुंचना बेहद निराशाजनक है। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विजय घाट पहुंचकर उन्हें याद किया और श्रद्धांजलि अर्पित की, मगर अन्य कोई भी बड़ा चेहरा नज़र नहीं आया।

लाल बहादुर शास्त्री हमेशा एक ईमानदार और उत्तरदायी नेता रहे। उन्होंने सच्चे मन से जनता के हित में साहसी बनकर काम किया। ज़रुरत पड़ने पर शास्त्री अपनी पार्टी के विरुद्ध हो कर काम करते थे। उनके साहसी नेतृत्व को आने वाली पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा।

ये बेहद ही निराशाजनक रहा कि सरकार की तरफ से कोई नेता लाल बहादुर शास्त्री को श्रंद्धांजलि देने विजय घाट नहीं पंहुचा।

आपको बता दें कि हर साल विजय घाट पर पुण्यतिथि कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली सरकार की ओर से करवाया जाता है। इस बार दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया वहां मौजूद थे।

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 2 अक्टूबर 1904 को हुआ था। ताशकंद घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने के एक दिन बाद 11 जनवरी, 1966 को ताशकंद में कथित तौर पर दिल का दौरा पड़ने के कारण उनकी मौत हो गई थी। वर्ष 1966 में उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।