RBI रिपोर्ट : साइबर अपराधियों और देश के बाहरी दुश्मनों को आसानी से जानकारी उपलब्ध करा रहा है ‘आधार’
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RBI रिपोर्ट : साइबर अपराधियों और देश के बाहरी दुश्मनों को आसानी से जानकारी उपलब्ध करा रहा है ‘आधार’

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा स्थापित इंस्टिट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंड रिसर्च इन बैंकिंग टेक्नोलॉजी (आईडीआरबीटी) के अध्ययन के मुताबिक आधार कार्ड को विभन्न योजनाओं से जोड़ने का लाभ अभी भी अस्पष्ट है।

इस अध्ययन में आधार कार्ड की सुरक्षा और समस्याओं को लेकर काफी सवाल उठाए गए हैं। ये अध्ययन आरबीआई द्वारा समर्थित है।

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने आधार कार्ड को सभी मुख्य योजनाओं में अनिवार्य कर दिया है। इसमें आम जनता के लिए चल रही जन कल्याणकारी योजनाएं भी शामिल हैं।

इन योजनाओं में आधार अनिवार्य करने पर सुप्रीम कोर्ट के साथ भी केंद्र सरकार की नोकझोक चली। लेकिन इस अध्ययन के मुताबिक अभी तक ये बता पाना मुश्किल है कि आधार अनिवार्य करने से क्या लाभ हुआ है।

सुरक्षा पर सवाल

अध्ययन में कहा गया है कि अपने अंतर्गत आने वाले डेटा का नियंत्रण और सुरक्षा ‘आधार कार्ड’ जारी करने वाले प्राधिकरण UIDAI के लिए काफी मुश्किल होगा। आधार की जानकारी लीक होने के कारण लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाने की भी आलोचना की गई है।

अध्ययन में कहा गया है ‘इतिहास में पहली बार साइबर अपराधियों और देश के बाहरी दुश्मनों के पास एक आसानी से उपलप्ध लक्ष्य है और इसके लिए ‘आधार’ का शुक्रिया।’

गौरतलब है कि अंग्रेज़ी अख़बार ‘द ट्रिब्यून’ ने हाल ही में आधार की जानकारी लीक का खुलासा किया था। अख़बार के मुताबिक उसनें 500 रुपए में आधार का डाटा हासिल करने वाली सर्विस खरीदी और उनको करीब 100 करोड़ आधार कार्ड का एक्सेस मिल गया था। अखबार का दावा है कि उनको लोगों के नाम, पता, पिन कोड, फोटो, फोन नंबर और ईमेल आईडी तक की जानकारी मिल गई थी।

लाभ को लेकर विरोधाभास

अध्ययन में कहा गया है कि डायरेक्ट बैंक ट्रान्सफर से आम जनता को कितना फायदा हुआ है इसे लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं है, बल्कि विरोधाभास है। एक तरफ सरकार का दावा है कि डायरेक्ट बैंक ट्रान्सफर के कारण लगभग 14 हज़ार करोड़ का लाभ हुआ है। वहीं एक कनाडा के गैर लाभकारी संगठन इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ सस्टेनेबल डेवलपमेंट का दावा है कि आधार के कारण सरकार को लाभ की जगह 97 करोड़ का नुकसान हुआ है।

करोड़ो लाभ से वंचित

अध्ययन में कहा गया है कि जन्कल्यानकारी योजनाओं में आधार अनिवार्य होने के कारण आम जनता को बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण में समस्या के कारण लगभग 5 करोड़ लोग योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।