अंबानी के फायदे के लिए देश की सुरक्षा रखी ताक पर, भारत में बन्दूक बनाकर पाकिस्तान में बेचेगी ब्लैकलिस्टेड कंपनी
BH firstpost

अंबानी के फायदे के लिए देश की सुरक्षा रखी ताक पर, भारत में बन्दूक बनाकर पाकिस्तान में बेचेगी ब्लैकलिस्टेड कंपनी

मोदी सरकार रक्षा सौदों की आड़ में बड़े घोटालों को अंजाम दे रही है। जमकर उद्योगपतियों को फायदा पहुँचाया जा रहा है। देश की रक्षा के नाम पर सौदों की जानकारी भी छुपाई जा रही है और दूसरी तरफ अपने करीबियों को फायदा पहुँचाने के लिए देश की रक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। चौथी दुनिया की एक खबर के मुताबिक, मोदी सरकार पाकिस्तान के लिए हथियार देश में बनवा रही है।

सात नवंबर को डिफेंस एक्वीज़िशन कौंसिल की बैठक में ये फैसला लिया गया कि एक विशेष ब्लैक-लिस्टेड कंपनी रायनमेटल इंटरनेशनल होल्डिंग से सामान ख़रीदा जा सकता है, अगर पॉलिसी बदल दी जाय तो। इसीलिए ये ज़रूरी मीटिंग बुलाई गई थी, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने की।

इस ब्लैक-लिस्टेड कंपनी से सामान ख़रीदने का कारण ये बताया गया कि हमारे देश की एक क्रिटिकल सिचुएशन में क्रिटिकल रिक्वायरमेंट है, इसलिए सामान ख़रीदने की ज़रूरत है। ये कंपनी भारत में ब्लैक-लिस्टेड है और इसपर बैन लगा हुआ है। बैन इसलिए लगा हुआ है, क्योंकि इस कंपनी का सामान घटिया है और इसपर रक्षा सौदों के लिए रिश्वत देने के आरोप हैं।

पहले खुद भाजपा ही इस कंपनी का विरोध कर चुकी है। तो फिर अब ऐसा क्या हुआ जो सरकार में आते ही भाजपा कंपनी से हथियार खरीदने को तैयार है?

इस कंपनी ने इस वर्ष के शुरुआत में एक एमओयू रिलायंस डिफेंस के साथ साइन किया, जिस कंपनी के मालिक उद्योगपति श्री अनिल अंबानी हैं, जिन्हें मोदी सरकार का करीबी माना जाता है। अनिल अंबानी ने गन और एम्यूनिशन दोनों के लिए एमओयू साइन किया है। जिसके तहत दोनों कम्पनियाँ मिलकर भारत में ये गन बनाएगी।

सवाल ये है कि भारत को अगर उदाहरण के लिए 400 गन्स की ज़रूरत है, वो भारत ख़रीद लेगा फिर इसके बाद ये गन्स कहां जाएंगी? किसको बेची जाएंगी? एंटी-एयरक्राफ्ट गन सिंगापुर को बेचीं जाएंगी। लेकिन सिंगापुर के पास तो इतनी बड़ी आर्मी है नहीं कि वो एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल करे।

ये गन्स सिंगापुर के रास्ते पाकिस्तान भेजी जाएंगी। इसका सीधा-सीधा मतलब है कि वो गन बनेंगी भारत में, लेकिन सिंगापुर के ज़रिए बेची पाकिस्तान को जाएंगी। मतलब पाकिस्तान को ये गन देने के लिए मोदी सरकार अपने देश की ज़मीन मुहैय्या करा रही है।

बात-बात पर देश प्रेम की बात करने वाली मोदी सरकार अपने प्रेमी उद्योगपति के फायदे के आगे झुक गई है। गौरतलब है कि फ्रांस के साथ हुए लड़ाकू विमान राफेल के सौदे में भी सरकार पर अनिल अम्बानी को फायदा पहुँचाने का आरोप लगा है।

बता दें, कि अनिल अंबानी की कंपनी बड़े कर्ज़ों के नीचे दबी हुई है। हाल ही में चीन के बैंक ने भी कंपनी द्वारा कर्ज़ ना चुकाने पर उसके खिलाफ मामला दर्ज कराने की धमकी दी थी। लेकिन जिस तरह मोदी सरकार देश की सुरक्षा ताख पे रख सभी रक्षा सौदों में अनिल अंबानी को शामिल कर रही है उससे लगता है वो जल्द ही अपना कर्ज़ा उतार देंगे।