अमित शाह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने वाला CBI अफसर मुसीबत में, अफसर खुद CBI घेरे में
BH firstpost

अमित शाह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने वाला CBI अफसर मुसीबत में, अफसर खुद CBI घेरे में

‘द वायर’ की एक खबर के अनुसार सोहराबुद्दीन मामले में अमित शाह के खिलाफ जांच करने वाले सीबीआई ऑफिसर संदीप तामगड़गे 2015 से खुद ही सीबीआई की जांच झेल रहे हैं। तामगड़गे सोहराबुद्दीन मामले में जांच ऑफिसर (आईओ) थे। उनके खिलाफ सीबीआई ने जो केस दर्ज किया है, उसी में से दो गवाह ये बयान दर्ज करा चुके हैं कि सीबीआई उन्हें तामगड़गे के खिलाफ झूठे बयान देने पर मजबूर कर रही है।

गौरतलब है कि भाजपा पर सीबीआई का दुरूपयोग करने के आरोप लग चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट भी सीबीआई को केंद्र सरकार का तोता कह चूका है।

क्या है सोहराबुद्दीन मामला

सोहराबुद्दीन शेख और उनकी पत्नी कौसार बी का कथित तौर पर गुजरात एंटी टेररिज्म स्कॉव्ड ने हैदराबाद से सांगली महाराष्ट्र जाते समय अपहरण कर लिया था। नवम्बर 2005 में, सोहराबुद्दीन की कथित फर्ज़ी-एनकाउंटर में मौत हो गई थी।

इसके बाद दिसंबर 2006 में इस हत्या के चश्मदीद गवाह प्रजापति की भी कथित तौर पर पुलिस ने छापरी गांव में हत्या कर दी थी। इस मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, गुलाबचंद कटारिया, राजस्थान के बिजनेसमैन विमल पाटनी, पूर्व गुजरात पुलिस चीफ पीसी पांडे, गुजरात पुलिस ऑफिसर अभय चुड़ासामा, राजस्थान आईपीएस ऑफिसर दिनेश एमएन और गुजरात कॉप डीजी वंजारा पर आरोप लगे थे।

प्रजापति और सोहराबुद्दीन मामले में संदीप तामगड़गे ने ही अमित शाह के खिलाफ चार्जशीट दर्ज की थी। प्रजापति मामले में अमित शाह को मुख्य आरोपी भी बताया गया था। तामगड़गे ने इस मामले में जनवरी 2012 और अक्टूबर 2013 को अमित शाह से पूछताछ भी की थी।

2014 के बाद बदला खेल

2014 में भाजपा के सत्ता में आने के कुछ हफ्ते बाद ही अप्रैल 2014 में, तामगड़गे को इस केस से अलग कर दिया गया। इसके छह महीने बाद ही अमित शाह को इस मामले में बरी कर दिया गया।

अक्टूबर 2015 में, तामगड़गे को नागालैंड ट्रान्सफर कर दिया गया। इसके बाद सीबीआई ने तामगड़गे के खिलाफ दो मामले दर्ज किये। आरोप ये लगाया गया कि नागपुर में एसीबी में एसपी रहते हुए तामगड़गे ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ वर्कर्स एजुकेशन (सीबीडब्लूई) के एक अधिकारी के खिलाफ चार लाख रुपये रिश्वत लेने का झूठा मुकदमा चलाया था। इस मामले पहले सीबीआई जांच ऑफिसर से लेकर सुपरविज़नरी ऑफिसर तक सब यही मान रहे थे कि इस मामले में सीबीडब्लूई अधिकारी ने रिश्वत ली है और उसे सज़ा होनी चाहिए।

लेकिन भाजपा के सत्ता में आने के बाद इस मामले में सीबीआई ने अचानक से कहा कि आरोपी के खिलाफ सबूत पूरे नहीं हैं। इसके बाद इस मामले में सीबीआई ने एक प्रारंभिक जांच शुरू कर दी कि सीबीडब्लूई अधिकारी को फंसाया गया है। उस जांच में तामगड़गे को आरोपी माना गया।

सीबीआई का कहना है कि शांताराम पाटिल और संजय झा ने तामगड़गे के खिलाफ सबूत दिए हैं। ये दोनों वहीं लोग थे जिन्होंने सीबीडब्लूई अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़वाया था। अक्टूबर 2015 में, सिंहा ने नागपुर में एफआईआर दर्ज कराई कि सीबीआई उसपर तामगड़गे के खिलाफ झूठी गवाही देने के लिए ज़ोर दाल रही है। पाटिल ने भी नागपुर कोर्ट में एक हलफनामा दिया है जिसके मुताबिक सीबीआई उन्हें तामगड़गे के खिलाफ झूठे बयान देने के लिए धमका रही है।