संविधान जलाने पर मिलती है इतनी कड़ी सजा, क्या मोदी सरकार इन मनुवादियों को सजा देगी?
BH firstpost

संविधान जलाने पर मिलती है इतनी कड़ी सजा, क्या मोदी सरकार इन मनुवादियों को सजा देगी?

National Honour Act-1971 के सेक्शन-2 में संविधान को जलाने, फाड़ने या किसी भी तरह अपमानित करने पर 3 साल की सजा का प्रवधान है

9 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर आरक्षण के विरोध में जातिवादियों ने संविधान जलाया। इतना ही नहीं आरक्षण मुर्दाबाद, संविधान मुर्दाबाद, अंबेडकर मुर्दाबाद, संविधान जलाओ देश बचाओ के नारे भी लगाए। घटना के 48 घंटे बाद भी सरकार की तरफ से इनपर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

अखिल भारतीय भीम सेना के राष्ट्रीय प्रभारी अनिल तंवर ने संसद मार्ग पुलिस थाने में इसके खिलाफ शिकायत भी दर्ज करायी है।

क्या है संविधान जलाने की सजा?

सुप्रीम कोर्ट के वकील और संविधान विशेषज्ञ नितिन मेश्राम इस बारे में विस्तार से बताते हैं। उनका कहना है कि पूरी दुनिया में संविधान को सुप्रीम लॉ कहा जाता है। क्योंकि संविधान से उपर कुछ नहीं होता। राष्ट्रपति भी नहीं, प्रधानमंत्री भी नहीं। भारत में भी ऐसा ही है।

देश में जो कुछ भी होता है वो संविधान के अंतर्गत ही होता है। लेकिन कुछ लोग हैं जो संविधान की मर्जी से नहीं चलना चाहते। ऐसा नहीं है कि 9 अगस्त 2018 को भारत में पहली बार संविधान जलाया गया।

1957 में तमिलनाडु सरकार ने एक कानून बनाकर संविधान को पूरी तरह जलाए जाने को अपराध घोषित किया है। इस कानून के तहत संविधान को पूरी तरह जलाए जाने पर 3 साल की सजा का प्रावधान है।

फिर 1971 National Honour Act-1971 बना। इसके एक्ट के सेक्शन-2 में संविधान को जलाने, फाड़ने या किसी भी तरह अपमानित करने पर 3 साल की सजा का प्रावधान है।

 THE PREVENTION OF INSULTS TO NATIONAL HONOUR ACT, 1971   
THE PREVENTION OF INSULTS TO NATIONAL HONOUR ACT, 1971   

National Honour Act और तमिलनाडु वाले कानून कुछ फर्क है। जैसे 1957 में तमिलनाडु सरकार ने जो कानून बनाया था उसके मुताबिक संविधान को 'पूरी तरह' जलाने पर 3 की सजा होती है। लेकिन National Honour Act में पूरी तरह जलान का जिक्र नहीं है।

इसका मतलब ये हुआ कि अब अगर कोई संविधान जलाता है। भले ही पूरी तरह ना जलाए तो भी सजा मिलेगी। या संविधान जलाने वाले के मन में संविधान को अपमानित करने का उद्देशय ना हो तब भी सजा मिलेगी। कुल मिलाकर बात ये है कि कार्रवाई के दौरान नीयत नहीं देती जाएगी।

संविधान को जलाना अपने आप में इतना बड़ा अपराध है जो 3 साल की सजा हो सकती है। संविधान की आलोचना की जा सकती है लेकिन अपमानित करना अपराध है।

Prevention_Insults_National_Honour_Act1971.pdf
download