नोटबंदी का असर अब ग़रीब बच्चों की थाली पर, आंगनबाड़ी में नहीं मिल रहा मासूमों को पर्याप्त भोजन
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नोटबंदी का असर अब ग़रीब बच्चों की थाली पर, आंगनबाड़ी में नहीं मिल रहा मासूमों को पर्याप्त भोजन

नोटबंदी का कहर अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी टूटने लगा है। नोटबंदी के फैसले के बाद से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ग़रीब बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मील मुहैय्या कराने के लिए संघर्ष करते नज़र आ रहे हैं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अंग्रेज़ी डेली Times of India को बताया कि कैश की किल्लत के चलते मील की आपूर्ति में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता निशा चौरसिया ने बताया कि बच्चों को मील मुहैय्या कराने के लिए कार्यकर्ताओं ने हर मुमकिन कोशिश की। लोगों से उधार मांगने से लेकर बैंक की कतारों में लग कर बैंक अधिकारियों से कैश के लिए निवेदन किया। और जब इससे भी काम न बना तो कार्यकर्ताओं ने इस काम के लिए अपनी जेब से पैसे भी खर्च किए।

समेकित बाल विकास परियोजना (ICDS) के मासिक आंकड़ों के मुताबिक नवंबर महीने में बच्चों को मील मुहैय्या कराने में पिछले महीने के मुकाबले 6 फीसद की गिरावट आई है।

उत्तर प्रदेश के एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि कैश की किल्लत के चलते वह बच्चों को ताज़ा भोजन के बजाय सूखा खाना देने को मजबूर हैं।