गीता के नाम पर ऐसी लूट ! क्या अब गीता को भी आधार से लिंक करना होगा ?
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गीता के नाम पर ऐसी लूट ! क्या अब गीता को भी आधार से लिंक करना होगा ?

ये है गीता का दाम…38000 !

अभी तक किसी ने मुझे ट्रोल नहीं किया है कि मैं इस बात पर क्यों चुप हूँ कि हरियाणा सरकार ने पौने चार लाख रुपये में दस गीता ख़रीदी है। करीब 38,000 रुपये की एक गीता। राजू सहरावत ने आर टी आई से जानकारी हासिल की है। सभी प्रमुख मीडिया मंचों पर ख़बर छपी है।इसके बाद भी कोई मुझे नहीं ललकार रहा है। आई टी सेल के लोग कम से कम गीता के प्रति तो वफ़ादारी निभाएँ और खट्टर जी से पूछें कि क्या यह सही है? यह कैसे हो गया ? क्या अब गीता को भी आधार से लिंक करना होगा ?

क्या आप वाक़ई ऐसी व्यवस्था चाहते हैं कि ग़रीबों के लिए अस्पताल में दवा न हो, डाक्टर न हो, कालेज में शिक्षक न हो, सरकारी नौकरी न हो और गीता पर 38,000 ख़र्च हो?

यह इतना गंभीर मामला है कि मुख्यमंत्री को एक दिन के भीतर जाँच कर प्रेस कांफ्रेंस करना चाहिए। गीता पर हाथ रख कर यह भी बताना चाहिए कि दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी को दस लाख रुपये किस बात के दिए गए? क्या ये हितों के टकराव का मामला नही हैं ? क्या वे अपनी पार्टी के सरकार से अपनी कला का दाम ले रहे हैं ?

मैं भक्तों को समझता हूँ। वे सब बर्दाश्त कर सकते हैं मगर गीता के नाम पर ऐसी लूट नहीं सह सकते। इसीलिए भक्त सारा ज़ोर चम्मच चोरी पर ट्रोल करने में लगा रहे हैं ताकि गीता वाली बात दब जाए।

मैं उनकी शर्मिंदगी समझता हूँ। दरअसल भक्तों का दोष नहीं है। हमारे सिस्टम की जो ख़ामी है वो सरकार बदलने से नहीं दूर होती। महँगी राजनीति के लिए काला धन चाहिए ही चाहिए, चाहे वो गीता बेच कर ही क्यों न आए। मैं आहत नहीं होता हूँ पर दुख ज़रूर हुआ कि धर्म के नाम पर हम एक दूसरे को मार देते हैं और उसी धर्म की सबसे अच्छी किताब के नाम पर फर्जी बिल भी बन जाता है! दुखद।

चम्मच चोरी की घटना पर मुझे ट्रोल किया जा रहा है जैसे मैं भी लंदन गया था। गीता के नाम पर इस चोरी की ख़बर पर भक्त आपस में ट्रोल करें। एक दूसरे का सर खुजाएं।

लेखक- रवीश कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

एनडीटीवी इंडिया में न्यूज एंकर हैं।