विपक्षी नेता के बोल क्यों बोल रहे हैं PM मोदी ? क्या भूल गए हैं गुजरात में 22 साल से बीजेपी की सरकार है!
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विपक्षी नेता के बोल क्यों बोल रहे हैं PM मोदी ? क्या भूल गए हैं गुजरात में 22 साल से बीजेपी की सरकार है!

गुजरात के तथाकथित विकास की बातें 2014 लोकसभा चुनावों पर हावी रहीं थी। भाजपा प्रवक्ता से लेकर प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी तक रैलियों और चुनावी सभाओं में गुजरात के विकास मॉडल पर बात कर रहे थे।

इस राज्य के उस तथाकथित विकास मॉडल ने नरेंद्र मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री बनाने में एक बड़ी भूमिका निभाई थी।

इसलिए ये उम्मीदें थी कि अब जब गुजरात में विधानसभा चुनाव है तो लोगों को इस गुजरात मॉडल के बारे में करीब से जानना का मौका मिलेगा और पीएम मोदी भी गुजरात में अपने लगभग 15 साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान हुए विकास के बारे में जनता को बताएंगे।

लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है और पीएम मोदी इस तरह से बर्ताव कर रह हैं कि मानों गुजरात में कांग्रेस की सरकार हो और भाजपा विपक्ष में हो।

2014 में गुजरात के विकास का गुणगान करने वाले मोदी ने अब गुजरात विधानसभा चुनाव में कहा है कि सालों से केंद्र में कांग्रेस की सरकार होने के कारण वो गुजरात में विकास ही नहीं कर पाए।

कई बार चुनाव के दौरान ये देखा जाता है कि सत्ताधारी पार्टी अपनी सरकार द्वारा किये हुए कार्यों के बारें में बात करना चाहती है लेकिन विपक्ष उसे दूसरें मुद्दों में उलझाना चाहता है। उत्तरप्रदेश चुनाव उसका एक उदाहरण है, जहाँ सपा की सरकार के कार्यों के बारे में बात न करके कब्रिस्तान-शमशान, ईद-दिवाली और लव जिहाद पर चुनाव को केन्द्रित किया गया।

लेकिन गुजरात विधानसभा चुनाव में विपक्ष लगतार पीएम मोदी से विकास के बारे में पूछ रहा है और पीएम मोदी मुग़ल, राम मंदिर और पाकिस्तान की बात कर रहे हैं।

हालत ये है कि गुजरात में 22 साल तक भाजपा की सरकार होने के बावजूद भाजपा ने इस चुनाव में रिपोर्ट कार्ड पेश नहीं किया है। क्या पिछले 22 सालों में ऐसा कुछ नहीं है जिसे भाजपा अपनी सरकार की उपलब्धि के रूप में जनता के सामने रख सके?

जिस तरह पीएम मोदी गुजरात के चुनावी अभियान में बयानबाज़ी कर रहे हैं, वो एक ऐसे इंसान के शब्द लगते हैं जो बहुत डरा हुआ हो और जीतने के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हो। इस तरह की बयानबाज़ी से प्रधानमंत्री की गरीमा भी चोटिल हुई है।

शायद पीएम मोदी के इस रूप का कारण ये भी हो सकता है कि अगर वो गुजरात हार जाते हैं तो उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल पर सवाल उठेंगें और फिर उनकी प्रधानमंत्री बनने की काबिलयत पर भी सवाल किए जाएंगें। 2019 में वो पार्टी का उतना मज़बूत चहरा नहीं रहेंगे साथ ही पार्टी के भीतर से भी उनके विरोध में आवाज़ें उठ सकती हैं।

भाजपा अब तक गुजरात का गुणगान करती रही है अगर वो यहाँ हार जाती है तो उसके पास अन्य कोई ऐसा राज्य नहीं है जिसे वो मॉडल के रूप में पेश कर सके। छत्तीसगढ़ से लेकर झारखण्ड तक का बुरा हाल है। अब तक केंद्र में भी मोदी सरकार कुछ ऐसा नहीं कर सकी है जो 2019 में भाजपा के दावे को मज़बूत बना सके।

एक पार्टी के रूप में भाजपा की ओर से मोदी पर पड़ रहे दबाव और उनका अपना राजनीतिक करियर दाँव पर होने के कारण वो गुजरात में डरे हुए हैं और इसलिए मुद्दे भटकाने वाले विपक्ष की तरह बर्ताव कर रहे हैं।