मोदी सरकार का बजट झूठ का पुलिंदा? रवीश कुमार बोले- क्या वित्त मंत्री ने लागत मूल्य पर किसानों से झूठ बोला ?
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मोदी सरकार का बजट झूठ का पुलिंदा? रवीश कुमार बोले- क्या वित्त मंत्री ने लागत मूल्य पर किसानों से झूठ बोला ?

क्या वित्त मंत्री ने लागत मूल्य पर किसानों से झूठ बोला?

बजट पर रवीश कुमार की त्वरित प्रतिक्रिया
(और ब्योरे के लिए उनका पेज देखें)

2016-17 के लिए गेहूं कि प्रति क्विंटल लागत थी 2345 रुपये मगर सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया 1525। 2017-18 के लिए न्यूतनम समर्थन मूल्य था 1625 रुपये प्रति क्विंटल।

ये मेरा नहीं बल्कि कृषि लागत व मूल्य आयोग का आंकड़ा है। आप खुद भी उसकी वेबसाइट से चेक कर सकते हैं।

भारतीय खाद्य निगम की वेबसाइट पर 2017-18 के लिए प्रति क्विंटल गेहूं की लागत 2408.67 रुपये थी। न्यूनमत समर्थन मूल्य कितना था? 1625 रुपए प्रति क्विंटल।

अगर आप गणित में मेरी तरह फेल भी होते रहे होंगे तो भी समझ सकते हैं कि लागत का डेढ़ गुना दाम नहीं दिया जा रहा है।

क्या वित्त मंत्री ने जो कहा वह सही है?

वित्त मंत्री ने कैसे कह दिया कि सरकार रबी की उपज का दाम लागत से डेढ़ गुना दे रही है। यह सही नहीं है। कोई भी किसान बता सकता है कि प्रति क्विंटल गेहूं की लागत कितनी है और न्यूतनम समर्थन मूल्य कितना है।

सरकार का ही आंकड़ा है कि 2014-15 में गेहूं की लागत थी 1056.1 रुपये प्रति क्विंटल थी। मगर न्यूनतम समर्थन मूल्य मिला 1400 रुपये प्रति क्विंटल। क्या ये डेढ़ गुना हुआ? अक्तूबर 2017 में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1625 रुपये प्रति क्विंटल था तो क्या 2014-15 से 2017 तक लागत में कोई वृद्धि नहीं हुई? आप चाहें तो कृषि लागत व मूल्य आयोग की रिपोर्ट देख सकते हैं। फिर भी हिन्दी के अखबार कल किसानों को बताएंगे कि रबी का दाम लागत से डेढ़ गुना मिल रहा है। अब ख़रीफ़ का भी मिलेगा। न्यूतनम समर्थन मूल्य भी सिर्फ 6 से 7 फीसदी किसानों को ही मिलता है। सबको नहीं मिलता है।

10 करोड़ ग़रीब परिवारों को पांच लाख तक का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा। यह अच्छी ख़बर है। मगर अस्पताल कहां हैं। मिल कितने को रहा है। स्वास्थ्य बीमा पहले से चली आ रही है, अगर इसके फायदे के बारे में आंकड़े होते तो खुशी और दुगनी हो जाती। पर यह नारे के रूप में ज़बरदस्त चलेगा। कितना फंड होगा यह नहीं कहा, कह दिया कि पर्याप्त फंड होगा।

सरकार नए अस्पताल खोलने की बात कर रही है। एम्स जितने खुले उनका ही पता नहीं है। दस पंद्रह साल से एम्स का एलान हर बजट का आकर्षण रहा है।

हर तीन संसदीय क्षेत्र के बीच एक अस्पताल खुलेगा, यह जब तक खुलेगा तब तक सपना खूब दिखाएगा। जो ज़िला अस्पताल हैं, उन्हीं को भर्ती लायक बना दिया जाए तो जीवन आसान हो जाए। इन्हीं अस्पतालों के लिए डाक्टर नहीं हैं। सरकार को मेडिकल की सीट बढ़ानी चाहिए थी और एम डी की सीट भी। इसके बिना डाक्टर डाक्टर नहीं रहता।

वित्त मंत्री ने कहा कि ग्रुप सी और डी की नौकरी में इंटरव्यू ख़त्म कर दिया। यह नहीं बताया कि नौकरी भी ख़त्म कर दी। यह नहीं बताया कि बिना इंटरव्यू के कितनी नौकरियां दीं ताकि पता चले कि कितने जवानों का समय बचा। आप नौकरी सीरीज़ में सरकारी नौकरियों का हाल देख ही रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार ने 30 प्रतिशत सरकारी नौकरियां कम करने का फैसला किया है। केंद्र सरकार पांच साल से ख़ाली पड़े पदों को ख़त्म करने जा रही है।

वित्त मंत्री ने कहा कि फुटवियर में नौकरियां बढ़ रही हैं। आप आगरा फोन कर लें, जो यूपी का फुटवियर सेंटर हैं, यहां हर व्यापारी बताएगा कि 40 फीसदी घरेलू और निर्यात कम हुआ है तो नौकरियां कहां हो गईं हैं। दिल्ली में फुटवियर उद्योग जगत का मेला लगा है। उसके बारे में खबर छपी है कि इसे 200 करोड़ की मदद की ज़रूरत है तब जाकर 3 लाख रोज़गार पैदा होगा। यह खबर बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी थी

सरकार ने कहा है कि अगले चार साल में स्कूलों में ढांचा निर्माण के लिए सरकार एक लाख करोड़ खर्च करेगी। अब ये हेडलाइन में शानदार लगेगा। पिछले बजट में समस्त शिक्षा बजट 80,000 करोड़ से भी कम थी। पिछले बजट में स्कूलों के लिए 43,554 करोड़ दिया गया था। इस हिसाब से सरकार ने स्कूलों पर बजट कम कर दिया। अगर आप 43,554 करोड़ को चार से गुना करेंगे तो यह 1 लाख 74 हज़ार करोड़ से कम होगा।

यानी इस बजट में स्कूली शिक्षा का अनुमानित बजट 74 हज़ार करोड़ कम कर दिया गया है। चूंकि आपको हिन्दी के अखबार सही नहीं बताएंगे, इसलिए 1 लाख करोड़ मिलेगा स्कूलों को ऐसी हेडलाइन देकर आपको उल्लू बना देंगे। आपसे महीने के 500 रुपए भी लेंगे।