जब ‘आयरन लेडी’ इंदिरा ने बेटे की प्रेमिका सोनिया से कहा- डरो मत, मैने भी प्यार किया था
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जब ‘आयरन लेडी’ इंदिरा ने बेटे की प्रेमिका सोनिया से कहा- डरो मत, मैने भी प्यार किया था

आज इंदिरा गांधी की 33वीं पुण्यतिथि है। पूरा देश आज इंदिरा को याद कर रहा है लेकिन ज्यादातर लोग उन्हें उनके कड़े फैसलों के लिए याद कर रहे हैं। इंदिरा को सिर्फ उनके कड़े या क्रुर फैसलों के लिए याद करना न्यायसंगत नहीं होगा। आज भी सुदूर गांवों में प्रधानमंत्री का मतलब सिर्फ इंदिरा गांधी होता है। इंदिरा की छवि इतनी विकराल थी कि अभी तक लोग उससे बाहर नहीं निकल पाए हैं। देहात के किसी बुजुर्ग से जब भारत के दो प्रधानमंत्री का नाम पूछा जाता है तो उसमें से एक नाम इंदिरा का जरूर होता है।

अगर ये कहा जाए कि भारत में व्यक्तिवाद का उदय इंदिरा गांधी से हुआ तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा। एक वक्ता था जब क्या मर्द, क्या औरत सभी इंदिरा के मुरीद हुआ करते थे। उनके बोलने का अंदाज, कपड़ों की सहूलियत और चलने का ढंग बिना सोशल मीडिया के ट्रेंडिंग हुआ करता था। आज भी गांव की महिलाओं में इंदिरा की छवि सिर पर पल्लू रखने वाली तेज तर्रार औरत की ही है।

लेकिन कब नेहरू की प्यारी ‘इंदु’ अपने चट्टान जैसे फैसलों की बदौलत ‘आयरन लेडी’ बन गयी किसी को पता ही नहीं चला। आज के दिन लगभग सभी इंदिरा के आयरन लेडी वाली छवि की व्याख्या कर रहे हैं इसलिए हम सिर्फ ये नहीं करेंगे। हम इंदिरा के प्रेमिका, पत्नी, मां और बेटी वाली छवि को टटोलने की कोशिश करेंगे।

जैसे कि हम जानते हैं इंदिरा गांधी ने कड़ी मशक्कत और अखण्ड विवाद के बाद प्रेम विवाह किया था, लेकिन जब उन्हें ये पता चला की उनका बेटा भी प्रेम विवाह करना चाहता है तब उनका क्या रिएक्शन था?

सोनिया गांधी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि इंदिरा गांधी को राजीव के बारे में पता चल गया था इसलिए वो न्यूयार्क से लौटते वक्त लंदन में अचानक रुक गईं और उन्होंने राजीव से कहा कि सोनिया से कहो कि मुझसे आकर मिले।

सोनिया गांधी ने कहा कि एक आम लड़की की तरह मैं भी बहुत नर्वस हो गई थी, क्योंकि होने वाली सास की छवि काफी कड़क होती है, पहले दिन तो मैं मिल ही नहीं पाई थी लेकिन दूसरे दिन मैं मिलने गई उनसे तो उन्होंने मुझे कहा कि डरो नहीं, मैंने भी प्यार किया था।

सागरिका घोष की किताब ‘Indira: India’s Most Powerful Prime Minister’ में इंदिरा गांधी के निजी जीवन पर भी रौशनी डालने की कोशिश की गई है जिसकी वजह से किताब काफी विवादों में भी रही। फिरोज गांधी से इंदिरा का प्रेमविवाह होने के बावजूद दोनों का तलाक हो गया था।

इन तमाम बातों से इतर , इंदिरा ने राजनीति में जहाँ एक सख्त राजनेता की छवि बनाई वहीं प्रेम और रिश्तों में नरमी के साथ एक कोमल ह्रदय का परिचय दिया।

आज इंदिरा की पुण्यतिथि पर राहुल गाँधी ने भी अपनी दादी को याद किया ।