मीडिया में कुछ पत्रकार गलत भूमिका निभा रहे हैं जिसका खामियाजा हमें और पंकज झा जैसों को भुगतना पड़ रहा है : अभिसार शर्मा
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मीडिया में कुछ पत्रकार गलत भूमिका निभा रहे हैं जिसका खामियाजा हमें और पंकज झा जैसों को भुगतना पड़ रहा है : अभिसार शर्मा

“हिन्दुओं की हत्या को ठहराया जायज़ ! बिना इजाज़त तिरंगा यात्रा निकाली ही कैसे? भारत माता की जय जैसे भड़काऊ नारे लगाए ही क्यों?”

दैनिक भारत नाम के अफवाह फैलाने और दंगे करवाने वाले फेसबुक पेज मेरे और पंकज झा के बारे में कुछ भी अनर्गल छाप रहा है। अफवाह तंत्र की सक्रियता और बगैर हकीकत परखे बहाव में आ जाने वाली जनता का ये आलम है की सिर्फ आप तक हकीक़त,तथ्य पहुँचाने वाले संवाददाताओं को जान से मारने की धमकियाँ मिलरही हैं। उनके परिवार तक को बक्शा नहीं जा रहा है। पंकज झा कासगंज गए थे। वहां क्या हुआ उस पर रिपोर्ट की,बगैर किसी लाग लपेट के , बगैर किसी को गुनहगार ठहराए और उसका परिणाम आपके सामने है। पढ़िए उन्होंने अपने ट्विटर पर क्या लिखा है :

” सवेरे से कुछ ख़ास तरह के लोग हमें फ़ोन कर गालियॉं दे रहे हैं,जान से मारने की धमकी दे रहे हैं,बेटी का अपहरण करने की चुनौती दे रहे हैं।ये पूछ रहे हैं कि क्या देश में तिरंगा यात्रा निकालने के लिए भी परमिशन की ज़रूरत पड़ेगी?लेकिन ऐसा तो कासगंज के डीएम ने कहा था, तो सवाल उनसे बनता हैसालों के पत्रकारिता करते हुए आज ये दिन भी देखना पड़ा है। इन नंबरों को उठाना मैंने बंद कर दिया है। आप पूछेंगे क्यों ? उधर से आती हैं गालियॉं और गोली मारने की धमकियॉं”

बेटी का अपहरण? सचमुच? हिन्दू मुस्लिम टकराव मे माहौल अक्सर उग्र होता है और एक भी उत्तेजक बयान माहौल में आग लगाने जैसा काम कर सकता है। अगर माहौल में ज़हर घोलने का काम सिर्फ अतिवादी संस्थाओं नई की होती तो बात समझ आती। यहाँ तो मुख्यधारा से जुड़े पत्रकारों ने तथ्यों को ताक पर रखकर , देश की जनता के सामने अपनी सुविधा के हिसाब से गलतबयानी की। गौर कीजिये इस एंकर के उद्घोष पर। ..

हिंदुस्तान में ही क्या राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर झगड़े होंगे?
तिरंगा हिंदुस्तान में नहीं तो क्या पाकिस्तान में फहराया जाएगा?
कासगंज में तिरंगे के दुश्मन कौन लोग हैं. पुलिस उनके नाम क्यों नहीं बता रही?
देश के अंदर ऐसे कितने पाकिस्तान पनप रहे हैं?
क्या वंदे मातरम् और भारत माता की जय सांप्रदायिक नारे हैं?

तीसरी बात पर गौर कीजिये। कासगंज में तिरंगे के दुश्मन कौन हैं ! तिरंगे के दुश्मन कौन है? वाकई? ये हक़ीक़त क्यों छिपाई गयी के मुसलमान भी झंडा फहरा रहे थे ? ये बात तो तस्वीरों और खुद आई जी ठाकुर के बयानों से पुष्ट होती है। इसमें आपको कोई क्रांतिकारी खोजी पत्रकारिता करने की ज़रुरत भी नहीं है। तिरंगा यात्रा की अनुमति नहीं थी ,ये बात तो खुद प्रशासन कह रहा है। ABP न्यूज़ सिर्फ आपके सामने तथ्य रख रहा था। मगर उस चैनल के एंकर ने तो पहले ही दिन एक ख़ास समुदाय को पाकिस्तानी करार दे दिया। मुसलमान भी तो तिरंगा ही लहरा रहे थे ? फिर क्यों उन्हें तिरंगे का दुश्मन बताया जा रहा था ? और जब मुसलमान समुदाय भी तिरंगा फहरा रहा था , तब देश के अंदर पाकिस्तान पनपने की बात कहना कितना जायज़ है ? माहौल जब पहले से ही गर्म है तो पाकिस्तान को संवाद में लाने की क्या ज़रुरत है ? किसके राजनीतिक हित साधने के लिए ऐसी बातें की जा रही हैं ? और बात यहाँ आकर थमती नहीं। गलती पकडे जाने के बावजूद कोई माफ़ी नहीं। ऐसा झूठ फैलाने वालों पर कोई कार्रवाही नहीं। इसी ग्रुप से जुड़े एक अन्य पत्रकार ने तो एक अच्छे खासे इंसान को मृत घोषित कर दिया। और सोशल मीडिया में चलाया जाने लगा के चन्दन गुप्ता के साथ साथ राहुल उपाध्याय भी दंगों में चली गोली की भेंट चढ़ गया।

गलत बयानी ,झूठ , आंशिक तथ्य ,ये सब कब से मीडिया का काम हो गया ? और वह भी एक सांप्रदायिक टकराव में ? मीडिया गलतियां करता है ,इसमें दो राय नहीं। मगर जानबूझ कर ? क्या ये सही नहीं के इसी चैनल को अपने एक दुसरे रिपोर्टर को कासगंज भेजना पड़ा और नए सिरे से रिपोर्ट फाइल हुई? और इस रिपोर्टर द्वारा फाइल की गयी रिपोर्ट ,उस कार्यक्रम के झूठ के बिलकुल उलट थी? अगर आपकी बात में सत्यता थी ,तो अड़े रहते उसपर? मगर चैनल भी जानता है के उससे गलती हुई है। मगर ये महज़ एक मामूली गलती नहीं है। कासगंज में मुसलमानों के काल्पनिक तिरंगा विरोध को आपने अपने इस एक कार्यक्रम के ज़रिये पूरे देश में फैला दिया है। इस एंकर के झूठ का खामियाज़ा सिर्फ एक समुदाय नहीं ,मगर उस नफरत के परिणाम से वह तमाम लोग भुगतेंगे जो इसकी चपेट में आएंगे। क्योंकि जब सांप्रदायिक आग लगती है तो वह मज़हब पूछ कर किसी का घर नहीं जलाती। उसका कहर प्रजातांत्रिक होता है। सबको बराबरी से निगलता है।

इस झूठ का खामियाज़ा मेरे और पंकज झा जैसे पत्रकार भी भुगत रहे हैं। मैंने चुनौती देता हूँ के आप साबित करें के मैंने या पंकज कब चन्दन की मौत को जायज़ ठराया . हमने जो कहा, सब, हमारे ब्लोग्स और रिपोर्ट्स के ज़रिये सार्वजनिक पटल पर है। हम सिर्फ तथ्य ही रख रहे थे। जैसा के होना भी चाहिए। मगर समाज में हिंसा को बढ़ावा देने वाली एंकरिंग की क्या जवाबदेही है ? हिन्दू मुस्लिम में तनाव बना रहे ,ये किस राजनीतिक उल्लू को साधने मे लगे हुए हैं ?

क्या ये बात बरेली के ज़िलाधीश राघवेंद्र विक्रम सिंह ने नहीं कहा के आखिर ये तमाम यात्राएं मुसलमान बहुल इलाकों से क्यों निकाली जाती हैं और क्या भड़काऊ नारे लगाए जाते हैं। और मैं फिर स्पष्ट कर दूँ के भारत माता की जय और वंदे मातरम भड़काऊ नारे नहीं हैं। मगर मोहल्ले में जाकर पाकिस्तान का
ताना मारना गलत है। क्या उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने कासगंज के दंगे को राज्य पर कलंक नहीं कहा ? अब उनके बारे में क्या कहियेगा ? इन्हे देशद्रोही कहने की गुस्ताखी तो नहीं कर सकते न हम ?

दिक्कत ये है के सांप्रदायिक मामलों पर रिपोर्टिंग दिनबदिन मुश्किल होता जा रहा है। दो समुदाय मे हुए संघर्ष में, बहुमत से जुड़े लोग चाहते हैं के मीडिया दुसरे समुदाय को खलनायक करार दे। मगर, रिपोर्टिंग बहुतमतवाद नहीं होती। ये सच है के शक़्स चन्दन गुप्ता एक हिन्दू है मगर उसके चलते आप झूठ दिखला कर माहौल को और ख़राब तो नहीं कर सकते ? कितने और चन्दन गुप्ता की बलि चाहते हैं ये एंकर ? और सबसे बड़ी बात , सच तो ये है के आप हिन्दुओं के पक्ष में भी नहीं बोल रहे हैं। आप सिर्फ एक राजनीतिक दल के अघोषित प्रवक्ता बने हुए हैं। हिन्दू मुस्लिम तनाव पैदा करके आप उनके राजनीतिक हित साध रहे हैं। माहौल को खराब करके ,अमन शांति को ताक पर रख कर आप किस देशप्रेम की बात करते हैं ? क्या देश सुलगता रहे , यही देश्भक्ति है आपकी ? बुनियादी मुद्दों पर बहस न करके , किसानों ,नौकरीपेशा लोगों ,सरकार की नाकामियों के मुद्दे को न उठाकर आप लोगों का ध्यान क्यों भटका रहे हैं ? और चलो मान भी लिया के तुम पार्टी विशेष के पिछलग्गू हो ,तो देश में अस्थिरता पैदा करके आप मोदीजी के मेक इन इंडिया के सपने को कैसे पूरा कर रहे हो ? कम से कम सियासी वफ़ादारी तो सलीके से निभाओ ?

अगर देश में अतिवादी गट ,मुख्यधारा में प्रवेश कर रहे हैं ,तो इसलिए क्योंकि वह जानते हैं केउनका हवा देने केलिए मीडिया का एक तबका मौजूद है ,जिसे बड़ी तादाद में देखा जाता है। वह अपने जुर्म को छुपाते भी नहीं ,अलबत्ता उसे कैमरा में रिकॉर्ड करके वायरल करते हैं ,क्योंकि वह जानते हैं के मीडिया का एक तबका है जो मुद्दे को भटका कर उन्हें पीड़ित के तौर पर पेश करेगा। ऐसे लोगों को हवा देकर ,आप आम इंसान की जान जोखिम में डाल रहे हैं। हमारे बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को ताक पर रख रहे हैं। ये सिर्फ पत्रकारिता से बेईमानी नहीं ,अलबत्ता इस देश की सबसे महत्वपूर्ण,सबसे अहम् इकाई ,हमारे परिवार के साथ नाइंसाफी है। उसके सुकून ,उसकी सुख शांति पर ये लोग प्रहार कर रहे हैं। और ये ,न सिर्फ पत्रकार के तौर पर ,बल्कि एक पिता के तौर पर मुझे मंज़ूर नहीं।

लेखक- अभिसार शर्मा ( एबीपी न्यूज)